सीधे धारित विदेशी portfolio में भारतीय निवासी (ROR) की विश्वव्यापी आय भारत में कर योग्य है (धारा 5(1))। विदेशी शेयर और fund units पर 24 महीने बाद LTCG 12.5 प्रतिशत बिना indexation (धारा 112(1)(a)); उससे पहले बेचे गए हिस्से, ब्याज और dividend पर slab दर, जो surcharge और cess के साथ लगभग 39 प्रतिशत तक जाती है। manager बदलने या आवंटन बदलने पर हर बिक्री उसी वर्ष का कर है। जो कर के बाद बचता है, वही आगे बढ़ता है।
निवेश बीमाकर्ता के नाम पर पॉलिसी के भीतर रहते हैं। धारा 56(2)(xiii) और धारा 45(1B) "प्राप्त राशि" पर कर लगाती हैं, और Rule 11UACA / Rule 8AD सरेंडर या मैच्योरिटी के समय प्राप्ति में से चुकाए गए प्रीमियम घटाकर गणना करते हैं। पॉलिसी के भीतर बीमाकर्ता द्वारा किया गया पुनर्आवंटन पॉलिसीधारक के लिए कर योग्य घटना नहीं है। इसी में स्थगन है। मृत्यु लाभ प्रीमियम की राशि चाहे जो हो, धारा 10(10D) के आठवें परंतुक (a) के अंतर्गत कर-मुक्त रहता है।
भारतीय निवासी विदेशी बीमाकर्ता से नई जीवन बीमा पॉलिसी RBI की अनुमति के बिना नहीं ले सकता (FEMA 12(R)/2015-RB, Reg. 4); LRS में जीवन बीमा प्रीमियम सूचीबद्ध उद्देश्य नहीं है। 1 अप्रैल 2023 के बाद जारी और ₹ 5 लाख से अधिक वार्षिक प्रीमियम वाली पॉलिसी पर 10(10D) की छूट नहीं मिलती: सरेंडर slab दर पर कर योग्य है, LTCG दर पर नहीं। पॉलिसी Schedule FA में और CRS के ज़रिये आयकर विभाग को दिखती है। असली मामला NRI का है: विदेश में रहते हुए ली गई पॉलिसी लौटने के बाद रखी जा सकती है (Reg. 4(ii)) और RNOR विंडो में विदेशी आय भारत में कर योग्य नहीं होती।
UAE में व्यक्तिगत आयकर नहीं है, इसलिए वहाँ रहते हुए portfolio पर कर शून्य। भारत लौटकर ROR बनते ही विदेशी portfolio की विश्वव्यापी आय भारत में कर योग्य: हर बिक्री पर 12.5 प्रतिशत या slab, हर dividend पर slab, और Schedule FA में हर खाता।
NRI की विदेशी कमाई FEMA के दायरे से बाहर है, इसलिए पॉलिसी किसी भी आकार में विदेश से fund की जा सकती है। लौटने के बाद पॉलिसी Reg. 4(ii) के अंतर्गत रखी जा सकती है। RNOR के 2 से 3 वर्षों में विदेश में उपार्जित और विदेश में प्राप्त आय भारत में कर योग्य नहीं (धारा 5(1) परंतुक); उसके बाद भी कर तभी जब राशि प्राप्त हो।
private credit का ब्याज, hedge fund का वितरण और 24 महीने से पहले की बिक्री slab दर पर: लगभग 39 प्रतिशत हर वर्ष। शुद्ध वृद्धि 3.66 प्रतिशत; ₹ 10 करोड़ पच्चीस वर्ष में लगभग ₹ 24.6 करोड़।
रास्ते में कुछ कर योग्य नहीं। लागत के बाद 5.40 प्रतिशत की वृद्धि: ₹ 37.2 करोड़ सकल, और सरेंडर पर slab दर एक बार चुकाने के बाद लगभग ₹ 26.6 करोड़। अंतर ₹ 2 करोड़, और यह अंतर पंद्रह वर्ष से कम अवधि पर लगभग शून्य हो जाता है।
24 महीने से अधिक धारित विदेशी शेयरों पर 12.5 प्रतिशत LTCG (धारा 112(1)(a)), surcharge और cess अलग। वार्षिक realisation मान लें तो भी शुद्ध 5.25 प्रतिशत: ₹ 10 करोड़ से लगभग ₹ 35.9 करोड़।
₹ 5 लाख से अधिक प्रीमियम वाली पॉलिसी 10(10D) से बाहर है, इसलिए सरेंडर पर लाभ "अन्य स्रोतों से आय" के रूप में slab दर पर कर योग्य (धारा 56(2)(xiii)), 12.5 प्रतिशत पर नहीं। ₹ 37.2 करोड़ में से लगभग ₹ 10.6 करोड़ कर: ₹ 26.6 करोड़ बचते हैं। पॉलिसी लगभग ₹ 9 करोड़ से हारती है। कम-turnover equity portfolio के लिए ईमानदार उत्तर "नहीं" है।
LRS में USD 2,50,000 प्रति वित्त वर्ष विदेशी शेयर, fund और जमा में जा सकते हैं; ₹ 10 लाख से ऊपर की राशि पर 20 प्रतिशत TCS, जो ITR में credit हो जाता है। रास्ता खुला है, बस धीमा।
FEMA 12(R) Reg. 4: निवासी विदेशी बीमाकर्ता की जीवन बीमा पॉलिसी RBI की विशिष्ट या सामान्य अनुमति से ही ले या रख सकता है। कोई सामान्य अनुमति प्रकाशित नहीं मिली; LRS Master Direction और FAQ में जीवन बीमा प्रीमियम अनुमत उद्देश्य नहीं है (health insurance है, Reg. 3)। बिना अनुमति खरीद FEMA का उल्लंघन है। निवासी का यथार्थ रास्ता परिवार के NRI सदस्य, लौटने से पहले बना विदेशी trust, या GIFT City का अनसुलझा विकल्प है।
विदेशी निवेश के लिए LRS प्रेषण "अन्य उद्देश्य" में आता है: ₹ 10 लाख से ऊपर की राशि पर 20 प्रतिशत TCS (धारा 206C(1G), 2025 अधिनियम में धारा 394(1))। USD 2,50,000 (लगभग ₹ 2.4 करोड़) पर लगभग ₹ 46 लाख उसी वर्ष रुकते हैं।
यदि कोई निवासी वैध रूप से प्रीमियम भेज भी सके, TCS वही है। यह कर नहीं, cash-flow लागत है: Form 26AS में दिखता है, ITR में final tax liability के विरुद्ध credit होता है और शेष धारा 244A ब्याज के साथ refund। पॉलिसी यहाँ कुछ नहीं बदलती; NRI विदेशी कमाई से प्रीमियम भरे तो LRS और TCS का प्रश्न ही नहीं उठता।
भारत में estate duty नहीं है (1985 से) और उत्तराधिकार में मिली संपत्ति धारा 56(2)(x) से बाहर है। पर विरासत में मिले शेयरों की cost पुराने मालिक की ही रहती है (धारा 49(1)): वारिस बेचेंगे तो पूरा संचित लाभ उनके हाथ में कर योग्य। साथ में probate, विदेशी बैंक की KYC और महीनों की प्रक्रिया।
मृत्यु पर प्राप्त राशि धारा 10(10D) के आठवें परंतुक (a) के अंतर्गत कर-मुक्त है, प्रीमियम की सीमा से स्वतंत्र। ₹ 37.2 करोड़ का पूरा मूल्य नॉमिनी या ट्रस्ट को, बिना उस ₹ 10.6 करोड़ के जो जीवित रहते सरेंडर पर कटता। यह पॉलिसी का सबसे ठोस आयकर-लाभ है, और यही कारण है कि PPLI को पीढ़ी के हस्तांतरण की योजना के रूप में देखा जाता है, नकदी की योजना के रूप में नहीं।
| पॉलिसी में सकल मूल्य, सरेंडर से पहले | |
| सरेंडर पर कर (प्राप्ति में से प्रीमियम घटाकर) | |
| अंत में अंतर, पॉलिसी के पक्ष में | |
| पहले वर्ष में पॉलिसी जो कर स्थगित करती है | |
| अधिकतम लागत जिसके नीचे पॉलिसी रहनी चाहिए | |
| मृत्यु लाभ के रूप में प्राप्त हो तो (10(10D) आठवाँ परंतुक (a)) |