PPLI कैसे काम करता है: संरचना, पक्ष, नकदी प्रवाह और भारत से जुड़े नियम
दुबई में बैठे एक व्यवसायी को उसका private banker एक ऐसी जीवन बीमा पॉलिसी का प्रस्ताव देता है जिसके भीतर उसका पूरा निवेश पोर्टफोलियो रखा जा सकता है। कागज़ों पर वह पॉलिसी लगभग एक बैंक खाते जैसी दिखती है: एक custodian, एक portfolio manager, एक तिमाही statement। फिर भी उस पर बीमा कानून लागू होता है, बैंकिंग कानून नहीं, और इस अंतर से ही उसकी पूरी कर और उत्तराधिकार स्थिति तय होती है। व्यवसायी का पहला प्रश्न सरल है: यह चीज़ असल में काम कैसे करती है, और जब मैं दो साल बाद मुंबई लौटूँ तो भारत का कानून इसे किस नज़र से देखेगा?
यह लेख उसी प्रश्न का तकनीकी उत्तर है। पहले भाग में Private Placement Life Insurance (PPLI) की संरचना, उसके पक्ष, प्रीमियम से लेकर मृत्यु लाभ तक का नकदी प्रवाह और लागत की परतें समझाई गई हैं। दूसरे भाग में भारत की परत है: FEMA का बीमा विनियमन, LRS और TCS, आयकर अधिनियम की धारा 10(10D) और Schedule FA। विषय का व्यापक परिचय PPLI पिलर पृष्ठ पर है और यह लेख PPLI रणनीति श्रेणी का हिस्सा है। भारत लौटने वाले NRI के लिए समय-निर्धारण का प्रश्न अलग लेख भारत लौटने से पहले: NRI के लिए PPLI और RNOR विंडो में है।
PPLI एक बीमा अनुबंध है जिसके भीतर एक अलग निवेश खाता होता है
साधारण जीवन बीमा में बीमाकर्ता प्रीमियम लेता है, उसे अपने सामान्य कोष में मिलाता है और पॉलिसीधारक को एक तय राशि या एक घोषित बोनस का वादा करता है। PPLI में वह वादा नहीं होता। पॉलिसीधारक का प्रीमियम बीमाकर्ता की बैलेंस शीट पर एक अलग खाते (separate account या segregated account) में जाता है, जो केवल उसी पॉलिसी से जुड़ा होता है। उस खाते में क्या निवेश किया जाए, यह एक पेशेवर निवेश प्रबंधक तय करता है, और उसका मूल्य बाज़ार के साथ ऊपर-नीचे होता है। पॉलिसी का cash value ठीक उसी खाते का शुद्ध मूल्य है, न कम न अधिक।
इसे unit-linked पॉलिसी (भारत में ULIP) से अलग समझना ज़रूरी है। ULIP में पॉलिसीधारक बीमाकर्ता के पहले से बने कुछ फंडों में से चुनता है। PPLI में खाता पॉलिसीधारक के लिए विशेष रूप से खोला जाता है, उसमें व्यापक श्रेणी की संपत्तियाँ रखी जा सकती हैं, और न्यूनतम प्रीमियम आम तौर पर USD 1 मिलियन से ऊपर होता है। "private placement" शब्द का यही अर्थ है: पॉलिसी सार्वजनिक रूप से नहीं बेची जाती, बल्कि कुछ योग्य निवेशकों को व्यक्तिगत शर्तों पर जारी की जाती है।
दूसरी बात, जो भारतीय पाठक के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है: पॉलिसी में बीमा घटक वास्तविक होना चाहिए। एक ऐसा अनुबंध जिसमें मृत्यु पर केवल खाते का मूल्य लौटाया जाए, बीमा नहीं बल्कि एक निवेश खाता है, और जिस देश में पॉलिसी जारी हुई है उसके कानून के तहत भी वह बीमा नहीं माना जाएगा। इसलिए PPLI में cash value के ऊपर एक अतिरिक्त मृत्यु लाभ (sum at risk) होता है, जिसकी कीमत बीमाकर्ता हर महीने या हर साल खाते से काटता है।
पाँच पक्ष और उनकी भूमिकाएँ
एक PPLI संरचना में सामान्यतः पाँच पक्ष होते हैं, और उनके बीच का अलगाव ही पॉलिसी की सुरक्षा का आधार है।
पहला, पॉलिसीधारक (policyholder): वह व्यक्ति या ट्रस्ट जो अनुबंध का स्वामी है, प्रीमियम देता है, लाभार्थी नामित करता है और सरेंडर या आंशिक निकासी का अधिकार रखता है। दूसरा, बीमित व्यक्ति (life assured): जिसके जीवन पर पॉलिसी है। अक्सर यह पॉलिसीधारक ही होता है, लेकिन दोनों अलग हो सकते हैं, और परिवार की योजना में यह अंतर उपयोगी होता है। तीसरा, बीमाकर्ता: लक्ज़मबर्ग, सिंगापुर, आयरलैंड, लिकटेंस्टाइन या बरमूडा की एक विनियमित जीवन बीमा कंपनी, जो अनुबंध जारी करती है और जिस पर उस क्षेत्राधिकार का बीमा नियामक निगरानी रखता है।
चौथा, custodian बैंक: अलग खाते की संपत्तियाँ बीमाकर्ता के नाम पर, लेकिन उस पॉलिसी के लिए चिह्नित होकर, इसी बैंक में रखी जाती हैं। लक्ज़मबर्ग में यह एक कानूनी आवश्यकता है और बीमाकर्ता, custodian और नियामक के बीच एक त्रिपक्षीय समझौते के तहत होती है। पाँचवाँ, निवेश प्रबंधक: वह फर्म जो अलग खाते के भीतर निवेश निर्णय लेती है। कई ढाँचों में यह प्रबंधक परिवार का पहले से मौजूद private bank या family office की चुनी हुई फर्म होती है; कुछ में बीमाकर्ता एक insurance dedicated fund (IDF) उपलब्ध कराता है जिसकी इकाइयाँ खाता खरीदता है।
पॉलिसीधारक और निवेश प्रबंधक के बीच का संबंध यहाँ सबसे संवेदनशील बिंदु है। पॉलिसीधारक निवेश नीति (asset allocation, जोखिम स्तर, प्रतिबंधित संपत्तियाँ) तय कर सकता है, लेकिन दिन-प्रतिदिन के खरीद-बिक्री निर्णय प्रबंधक के होते हैं। यह "निवेशक-नियंत्रण" की सीमा अमेरिकी कर कानून से आई है और अधिकांश अंतरराष्ट्रीय बीमाकर्ता इसे अपने सभी ग्राहकों पर लागू करते हैं। इस सीमा का विस्तृत विवरण निवेश लचीलापन श्रेणी के हेज फंड वाले लेख में है।
प्रीमियम: नकद या संपत्तियों में
प्रीमियम एकमुश्त (single premium) या कुछ किस्तों में दिया जा सकता है। अधिकांश PPLI पॉलिसियाँ एकमुश्त या दो-तीन बड़ी किस्तों में वित्तपोषित होती हैं, क्योंकि पॉलिसी का उद्देश्य नियमित बचत नहीं बल्कि एक मौजूदा पोर्टफोलियो को एक कानूनी आवरण में रखना है। प्रीमियम नकद में हो सकता है, या कई क्षेत्राधिकारों में मौजूदा प्रतिभूतियों के हस्तांतरण (in-kind premium) के रूप में। दूसरे विकल्प के अपने कर प्रश्न हैं, विशेषकर उस व्यक्ति के लिए जो हस्तांतरण के समय किसी ऐसे देश का निवासी है जो हस्तांतरण को बिक्री मानता है; इस पर निवेश लचीलापन श्रेणी में अलग लेख है।
प्रीमियम मिलते ही बीमाकर्ता प्रवेश शुल्क (यदि कोई हो) काटकर शेष राशि अलग खाते में जमा करता है, और पॉलिसी दस्तावेज़ में बीमित राशि, मृत्यु लाभ का सूत्र, शुल्क अनुसूची, सरेंडर की शर्तें और लाभार्थी सूची दर्ज होती है।
अपना PPLI संबंधी प्रश्न और उससे जुड़े देशों के नाम बताएँ, ताकि बातचीत सही विषय से शुरू हो सके।
अपना प्रश्न बताएँ →Cash value: पॉलिसी के भीतर संचय
अलग खाते में जो कुछ अर्जित होता है, लाभांश, ब्याज, पूंजीगत लाभ, वह सब खाते में ही रहता है और पुनर्निवेशित होता है। बीमाकर्ता के क्षेत्राधिकार में, जैसे लक्ज़मबर्ग या सिंगापुर में, बीमाकर्ता स्वयं पॉलिसीधारक की ओर से इस आय पर कोई कर नहीं देता। यही वह बिंदु है जहाँ से "कर स्थगन" की चर्चा शुरू होती है: पॉलिसीधारक के देश का कर कानून यह तय करता है कि खाते के भीतर हुई आय पर उसे हर साल कर देना है, या केवल तब जब पैसा पॉलिसी से बाहर निकले। भारत के लिए यह प्रश्न नीचे "भारत की परत" में है।
Cash value में से हर अवधि में तीन तरह की कटौतियाँ होती हैं: बीमाकर्ता का प्रशासन शुल्क, मृत्यु जोखिम की कीमत (cost of insurance), और custodian तथा निवेश प्रबंधक के शुल्क। ये सब खाते से सीधे कटते हैं, पॉलिसीधारक की जेब से नहीं। इसलिए पॉलिसी के statement में जो शुद्ध मूल्य दिखता है वह इन सब कटौतियों के बाद का होता है।
मृत्यु लाभ: cash value और sum at risk
बीमित व्यक्ति की मृत्यु पर बीमाकर्ता लाभार्थी को मृत्यु लाभ देता है। PPLI में यह आम तौर पर दो हिस्सों का योग है: उस दिन का cash value, और उसके ऊपर एक अतिरिक्त राशि (sum at risk) जो पॉलिसी की शर्तों में तय होती है, उदाहरण के लिए cash value का एक निश्चित प्रतिशत, या बीमित व्यक्ति की आयु के अनुसार घटता हुआ प्रतिशत। बीमाकर्ता इस अतिरिक्त राशि का जोखिम पुनर्बीमाकर्ता (reinsurer) को देता है और उसकी कीमत खाते से काटता है। जितनी अधिक sum at risk, उतनी अधिक कटौती, इसलिए PPLI में इसे न्यूनतम आवश्यक स्तर पर रखा जाता है ताकि अनुबंध बीमा बना रहे और लागत कम हो।
मृत्यु लाभ पॉलिसी के लाभार्थी को सीधे दिया जाता है, बीमित व्यक्ति की संपदा (estate) को नहीं, जब तक कि लाभार्थी संपदा ही न हो। यह अंतर उत्तराधिकार में निर्णायक है: भुगतान वसीयत, probate या उत्तराधिकार प्रमाणपत्र से नहीं गुज़रता, बल्कि बीमा अनुबंध के तहत होता है।
सरेंडर, आंशिक निकासी और पॉलिसी ऋण
पॉलिसीधारक पॉलिसी को पूरी तरह सरेंडर कर सकता है, जिस पर उसे उस दिन का cash value, किसी सरेंडर शुल्क को घटाकर, मिलता है। अधिकांश PPLI में सरेंडर शुल्क पहले कुछ वर्षों में लागू होता है और फिर शून्य हो जाता है। आंशिक निकासी (partial surrender) में पॉलिसी चलती रहती है और खाते से एक निश्चित राशि निकालकर पॉलिसीधारक को दी जाती है; मृत्यु लाभ उसी अनुपात में घटता है।
कुछ बीमाकर्ता पॉलिसी ऋण (policy loan) की सुविधा देते हैं: पॉलिसीधारक cash value के एक हिस्से तक बीमाकर्ता से उधार लेता है, पॉलिसी गिरवी रहती है और ब्याज खाते से या अलग से चुकाया जाता है। ऋण को निकासी न मानने की बात कुछ देशों के कर कानून में है, लेकिन भारत के आयकर कानून में इस पर कोई प्रकाशित स्थिति हमें नहीं मिली, इसलिए भारतीय निवासी के लिए ऋण को "कर-मुक्त तरलता" मानकर योजना बनाना उचित नहीं है; लिखित राय लें।
लागत की चार परतें
PPLI की लागत को चार परतों में देखना उपयोगी है। पहली, बीमाकर्ता का शुल्क: प्रीमियम पर एक बार का प्रवेश शुल्क और उसके बाद cash value पर एक वार्षिक प्रतिशत, जो सामान्यतः पॉलिसी का आकार बढ़ने के साथ घटता है। दूसरी, cost of insurance: sum at risk पर आयु और स्वास्थ्य के अनुसार। तीसरी, custodian और निवेश प्रबंधक का शुल्क, जो उसी स्तर पर होता है जैसा उसी बैंक में एक सामान्य discretionary खाते पर होता। चौथी, अंतर्निहित फंडों का व्यय अनुपात, यदि खाता फंडों में निवेश करता है। सटीक अंक बीमाकर्ता और पॉलिसी के आकार पर निर्भर करते हैं; हमने उन्हें यहाँ जानबूझकर नहीं दिया है, क्योंकि कोई एक "सामान्य" दर नहीं है।
निर्णायक तुलना यह है: पॉलिसी की कुल वार्षिक लागत बनाम वह कर जो उसी पोर्टफोलियो पर एक सामान्य कर योग्य खाते में हर साल लगता। यदि कर की बचत या स्थगन का मूल्य लागत से अधिक है और पॉलिसी लंबे समय तक चलती है, तो संरचना तर्कसंगत है; अन्यथा नहीं। भारतीय निवासी के लिए यह गणित उस देश के निवासी से अलग है जहाँ खाते के भीतर की आय स्पष्ट रूप से कर-मुक्त है, और इसे अगले भाग में समझाया गया है।
भारत की परत, पहला प्रश्न: क्या आप यह पॉलिसी ले भी सकते हैं?
भारत में विदेशी जीवन बीमा का प्रवेश द्वार Foreign Exchange Management (Insurance) Regulations, 2015 (अधिसूचना FEMA 12(R)/2015-RB, 29 दिसंबर 2015) है। इसका विनियम 4 कहता है कि भारत में निवासी व्यक्ति भारत के बाहर के बीमाकर्ता की जीवन बीमा पॉलिसी तभी ले या रख सकता है जब वह पॉलिसी RBI की विशिष्ट या सामान्य अनुमति के तहत हो। विदेशी जीवन बीमा के लिए कोई सामान्य अनुमति हमें प्रकाशित रूप में नहीं मिली। तुलना के लिए, विनियम 3 स्वास्थ्य बीमा के लिए LRS सीमा के भीतर सामान्य अनुमति देता है; जीवन बीमा के लिए ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।
इसका सीधा अर्थ: भारत का कर-निवासी व्यक्ति, जो कभी NRI नहीं रहा, एक नई PPLI पॉलिसी लक्ज़मबर्ग या सिंगापुर के बीमाकर्ता से बिना RBI की पूर्व अनुमति के नहीं ले सकता। LRS की Master Direction में जीवन बीमा प्रीमियम एक अनुमत उद्देश्य के रूप में सूचीबद्ध नहीं है (यह अनुपस्थिति हमने RBI के पाठ और FAQ दोनों में जाँची है)। इसलिए "LRS से USD 2,50,000 भेजकर पॉलिसी ले लीजिए" वाला प्रस्ताव, जो कई मध्यस्थ देते हैं, FEMA के पाठ से मेल नहीं खाता। इस विषय पर पूरा लेख LRS, FEMA और विदेशी जीवन बीमा है।
विनियम 4(ii) दूसरा और अधिक उपयोगी रास्ता खोलता है: जो व्यक्ति भारत के बाहर निवासी रहते हुए किसी विदेशी बीमाकर्ता की जीवन बीमा पॉलिसी ले चुका है, वह भारत लौटकर निवासी बनने के बाद भी उस पॉलिसी को रख सकता है। यह पॉलिसी के लिए किसी नई अनुमति की आवश्यकता के बिना है। इसलिए भारत से जुड़े परिवारों के लिए PPLI की वास्तविक योजना NRI सदस्य के माध्यम से बनती है: विदेश में रहते हुए, विदेशी आय से, पॉलिसी लें; लौटने पर रखें। एक चेतावनी, जो व्यवसायी विश्लेषण पर आधारित है: लौटने के बाद भारतीय निवासी निधियों से उस पॉलिसी का प्रीमियम भरना FEMA का उल्लंघन माना जा सकता है, इसलिए किस्तों वाली पॉलिसी में सारी किस्तें लौटने से पहले या विदेशी खातों से पूरी करने की योजना बनाएँ।
विनियम 4 का परंतुक भी ध्यान में रखें: यदि प्रीमियम भारत से प्रेषण करके दिया गया है तो मैच्योरिटी या दावे की राशि प्राप्ति के सात दिनों के भीतर भारत लानी होगी। NRI-काल में विदेशी आय से भरी गई पॉलिसी पर यह अपने शब्दों में लागू नहीं होता।
भारत की परत, दूसरा प्रश्न: LRS और TCS
उदारीकृत प्रेषण योजना (LRS) के तहत निवासी व्यक्ति प्रति वित्तीय वर्ष (अप्रैल से मार्च) USD 2,50,000 तक विदेश भेज सकता है, अनुमत चालू और पूंजी खाता उद्देश्यों के लिए। यह सीमा नाबालिगों सहित प्रत्येक व्यक्ति पर लागू है। लगभग 96 रुपये प्रति डॉलर की दर पर यह लगभग ₹ 2.4 करोड़ प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष है, और यह दर प्रकाशन के दिन RBI की संदर्भ दर से जाँची जानी चाहिए।
LRS प्रेषण पर स्रोत पर कर संग्रह (TCS) आयकर अधिनियम 1961 की धारा 206C(1G) के तहत होता है (2025 अधिनियम में समतुल्य प्रावधान धारा 394(1) बताया जाता है, जिसकी पुष्टि आपके कर सलाहकार से करा लें)। द्वितीयक स्रोतों के अनुसार वित्त अधिनियम 2025 से सीमा ₹ 10 लाख प्रति वित्तीय वर्ष है, और 2026 के बजट भाषण के अनुसार शिक्षा और चिकित्सा को छोड़कर अन्य उद्देश्यों पर इस सीमा से ऊपर 20% TCS लागू रहता है। विदेशी निवेश या बीमा प्रीमियम के लिए प्रेषण इसी "अन्य उद्देश्य" श्रेणी में आता है। यह TCS आपके अंतिम कर दायित्व के विरुद्ध समायोज्य है और ITR के माध्यम से वापस भी मिल सकता है, लेकिन यह तब तक नकदी प्रवाह पर बोझ है। दो बातें एक साथ ध्यान में रखें: पहली, LRS की सीमा PPLI के न्यूनतम प्रीमियम की तुलना में बहुत छोटी है; दूसरी, LRS का उपयोग विदेशी जीवन बीमा के लिए हो भी सकता है या नहीं, यह ऊपर वाला विनियम 4 का प्रश्न पहले तय करता है।
भारत की परत, तीसरा प्रश्न: पॉलिसी से मिलने वाली राशि पर आयकर
आयकर अधिनियम 1961 की धारा 10(10D) (1961 अधिनियम; 2025 अधिनियम में समतुल्य धारा) जीवन बीमा पॉलिसी से प्राप्त राशि को कर-मुक्त करती है, लेकिन इस पर परत-दर-परत शर्तें हैं। 1 अप्रैल 2012 के बाद जारी पॉलिसी में किसी भी वर्ष का प्रीमियम बीमित राशि के 10% से अधिक होने पर छूट नहीं मिलती। वित्त अधिनियम 2021 के बाद 1 फरवरी 2021 से जारी ULIP में वार्षिक प्रीमियम ₹ 2,50,000 से अधिक होने पर छूट नहीं; और वित्त अधिनियम 2023 के बाद 1 अप्रैल 2023 से जारी अन्य पॉलिसियों में वार्षिक प्रीमियम ₹ 5,00,000 से अधिक होने पर छूट नहीं। ये सीमाएँ एक व्यक्ति की सभी पॉलिसियों के कुल प्रीमियम पर लागू होती हैं।
प्रीमियम का आकार अकेले सभी PPLI अनुबंधों का कर परिणाम तय नहीं करता। जारी होने की तारीख, ULIP या अन्य पॉलिसी की श्रेणी, बीमाकर्ता और लागू छूट जाँचें। मृत्यु-भुगतान पर प्रीमियम सीमा का अपवाद हो सकता है, लेकिन Keyman जैसी अन्य वैधानिक सीमाएँ बनी रहती हैं।
यह प्रश्न भी उठता है कि क्या 10(10D) विदेशी बीमाकर्ता की पॉलिसी पर लागू होता है, क्योंकि धारा 2(28BB) "बीमाकर्ता" को भारतीय बीमा कंपनी के रूप में परिभाषित करती है। ITAT मुंबई ने Taragauri T. Doshi (2012) में और ITAT दिल्ली ने Sarvesh Naidu (अगस्त 2026) में विदेशी बीमाकर्ता की पॉलिसी पर 10(10D) की छूट स्वीकार की, यह कहते हुए कि 10(10D) परिभाषित शब्द "insurer" का उपयोग नहीं करता। ये अधिकरण के निर्णय हैं, स्थापित कानून नहीं, और PPLI पैमाने पर प्रीमियम सीमाओं के कारण इनका व्यावहारिक महत्व केवल मृत्यु लाभ तक सीमित है।
जब छूट नहीं मिलती तो क्या होता है? द्वितीयक स्रोतों और CBDT परिपत्र 15/2023 तथा नियम 11UACA के अनुसार, प्राप्त राशि में से पहले न घटाए गए कुल प्रीमियम को घटाकर शेष राशि "अन्य स्रोतों से आय" के रूप में धारा 56(2)(xiii) के तहत स्लैब दर पर कर योग्य है; ULIP-प्रकार की पॉलिसी में धारा 45(1B) के तहत पूंजीगत लाभ के रूप में। दोनों ही प्रावधान "प्राप्त" राशि की बात करते हैं। खाते के भीतर हर साल हुई अवास्तविक वृद्धि पर वार्षिक कर लगाने वाली कोई CBDT स्थिति या भारतीय निर्णय हमें नहीं मिला; इस अनुपस्थिति को पुष्टि न मानें, बल्कि वर्तमान प्रभार प्रावधानों के तहत "प्राप्ति पर कर" की स्थिति मानकर लिखित राय लें। भारतीय निवासी के लिए PPLI का वास्तविक आयकर लाभ इसी स्थगन में है, किसी छूट में नहीं, और साथ में मृत्यु लाभ की कर-मुक्ति में।
भारत की परत, चौथा प्रश्न: प्रकटीकरण
भारत का सामान्य निवासी (ROR) अपनी ITR में Schedule FA भरता है, जिसमें कैलेंडर वर्ष (जनवरी से दिसंबर) के दौरान किसी भी समय रखी गई विदेशी संपत्तियों का विवरण होता है। व्यवसायी मार्गदर्शिकाओं के अनुसार इसमें "Foreign Cash Value Insurance Contract or Annuity Contract" के लिए एक अलग तालिका है, जिसमें पॉलिसी का cash या surrender value देना होता है। जो व्यक्ति RNOR या अनिवासी है, उसे Schedule FA भरने की आवश्यकता नहीं है (व्यवसायी विश्लेषण)। अप्रकटीकरण के परिणाम काला धन अधिनियम 2015 के तहत आते हैं: 30% कर और ₹ 10 लाख प्रति वर्ष का दंड, जिसकी चर्चा Black Money Act और विदेशी बीमा पॉलिसी लेख में है।
प्रकटीकरण का दूसरा प्रवाह स्वचालित है। भारत ने 3 जून 2015 को CRS का बहुपक्षीय समझौता (MCAA) हस्ताक्षरित किया और 2017 से सूचनाएँ प्राप्त कर रहा है; अमेरिका के साथ FATCA समझौता 9 जुलाई 2015 का है। CBDT की मार्गदर्शिका के अनुसार cash value insurance contract एक रिपोर्ट योग्य वित्तीय खाता है, और CRS में इसके लिए कोई न्यूनतम सीमा नहीं है। इसका अर्थ यह है कि लक्ज़मबर्ग या सिंगापुर का बीमाकर्ता हर साल पॉलिसी का cash value अपने कर प्रशासन को देता है, जो उसे भारत के आयकर विभाग से साझा करता है। PPLI किसी भी अर्थ में कर विभाग से छिपाने का साधन नहीं है, और इसे ऐसा प्रस्तुत भी नहीं किया जाना चाहिए।
यह क्या नहीं है
PPLI कर से बचने का साधन नहीं है। भारतीय निवासी के लिए यह प्राप्ति तक कर का स्थगन, कर-मुक्त मृत्यु लाभ, और बीमा अनुबंध की उत्तराधिकार तथा लेनदार-सुरक्षा विशेषताओं का एक संयोजन है, जो एक कड़े विनियामक द्वार के पीछे उपलब्ध है। यह ऐसा उत्पाद नहीं है जिसे मुंबई या दिल्ली का निवासी अपने बैंक से फोन करके खरीद ले; FEMA का विनियम 4 उसके रास्ते में खड़ा है। उन देशों के विपरीत जहाँ पॉलिसी के भीतर की आय की कर-स्थिति स्पष्ट कानून से तय है, भारत में वह केवल प्रभार प्रावधानों की भाषा से अनुमानित है। और यह कोई गोपनीय संरचना नहीं है: पॉलिसी हर साल Schedule FA में और CRS के माध्यम से दिखाई देती है।
जो लोग इस संरचना से सबसे अधिक लाभ उठा सकते हैं, वे विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के परिवार हैं, जिनके पास विदेशी आय है, जो किसी दिन भारत लौटने की सोच रहे हैं, और जिनके लिए पॉलिसी लौटने से पहले विदेशी निधियों से पूरी तरह वित्तपोषित की जा सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
PPLI और ULIP में मूल अंतर क्या है?
ULIP में पॉलिसीधारक बीमाकर्ता के पहले से बने कुछ फंडों में से चुनता है और पॉलिसी खुदरा स्तर पर बेची जाती है। PPLI में प्रीमियम पॉलिसीधारक के लिए विशेष रूप से खोले गए अलग खाते में जाता है, जिसमें एक पेशेवर प्रबंधक व्यापक श्रेणी की संपत्तियाँ रख सकता है, और न्यूनतम प्रीमियम सामान्यतः USD 1 मिलियन से ऊपर होता है। दोनों ही बीमा अनुबंध हैं, लेकिन भारतीय आयकर में ULIP-प्रकार की पॉलिसी के लिए ₹ 2,50,000 की और अन्य के लिए ₹ 5,00,000 की प्रीमियम सीमा है, जिसके ऊपर 10(10D) की छूट नहीं मिलती।
क्या भारत का निवासी सीधे लक्ज़मबर्ग या सिंगापुर से PPLI ले सकता है?
FEMA 12(R)/2015-RB के विनियम 4 के अनुसार भारत में निवासी व्यक्ति विदेशी बीमाकर्ता की जीवन बीमा पॉलिसी केवल RBI की विशिष्ट या सामान्य अनुमति के तहत ले सकता है। जीवन बीमा के लिए कोई सामान्य अनुमति हमें प्रकाशित रूप में नहीं मिली, और LRS की सूची में जीवन बीमा प्रीमियम एक अनुमत उद्देश्य नहीं है। इसलिए निवासी के लिए नई पॉलिसी RBI की पूर्व अनुमति के बिना संभव नहीं है। विनियम 4(ii) के तहत NRI रहते हुए ली गई पॉलिसी लौटने के बाद रखी जा सकती है।
पॉलिसी के भीतर हर साल होने वाली आय पर भारत में कर लगता है या नहीं?
धारा 56(2)(xiii) और धारा 45(1B) दोनों "प्राप्त" राशि पर कर लगाते हैं, और नियम 11UACA तथा 8AD की गणना प्राप्ति पर आधारित है। पॉलिसी के भीतर की अवास्तविक वृद्धि पर वार्षिक कर लगाने वाली कोई CBDT स्थिति या भारतीय निर्णय हमें नहीं मिला। इस अनुपस्थिति को पुष्टि न मानें; वर्तमान प्रभार प्रावधानों के तहत स्थिति "प्राप्ति पर कर" की है, और भारतीय निवासी को इस पर लिखित कर राय लेनी चाहिए।
मृत्यु लाभ पर भारत में कर लगता है?
मृत्यु लाभ को स्वतः कर-मुक्त न मानें। लागू कर वर्ष, अनुबंध की बीमा के रूप में पात्रता और वैधानिक अपवादों की जाँच करें। किसी कर अधिकरण का निर्णय अपने तथ्यों तक सीमित हो सकता है; वह हर विदेशी पॉलिसी के लिए सामान्य स्वीकृति नहीं है।
अलग खाते की संपत्तियाँ किसके नाम पर होती हैं?
संपत्तियाँ कानूनी रूप से बीमाकर्ता के नाम पर custodian बैंक में रखी जाती हैं, लेकिन उस पॉलिसी के लिए चिह्नित और बीमाकर्ता के अन्य दायित्वों से अलग। पॉलिसीधारक का अधिकार अनुबंध के तहत cash value पर है, संपत्तियों पर प्रत्यक्ष स्वामित्व नहीं। लक्ज़मबर्ग जैसे क्षेत्राधिकारों में यह अलगाव कानून और नियामक की निगरानी में त्रिपक्षीय समझौते से सुरक्षित है, जिसकी चर्चा क्षेत्राधिकार वाले लेखों में है।
PPLI में कौन-कौन से शुल्क होते हैं?
चार परतें: बीमाकर्ता का प्रवेश और वार्षिक प्रशासन शुल्क, मृत्यु जोखिम की लागत (cost of insurance) जो sum at risk पर निर्भर करती है, custodian और निवेश प्रबंधक का शुल्क, और अंतर्निहित फंडों का व्यय। ये सब खाते से सीधे कटते हैं। सटीक दरें बीमाकर्ता और पॉलिसी के आकार पर निर्भर करती हैं, इसलिए तुलना का सही तरीका उसी पोर्टफोलियो पर एक कर योग्य खाते में हर साल लगने वाले कर से है।
क्या पॉलिसी को आयकर विभाग को बताना ज़रूरी है?
हाँ, दो तरह से। भारत का सामान्य निवासी ITR के Schedule FA में विदेशी cash value insurance contract की घोषणा करता है; RNOR और अनिवासी के लिए यह आवश्यक नहीं है। साथ ही बीमाकर्ता का क्षेत्राधिकार CRS के तहत हर साल पॉलिसी का cash value भारत को भेजता है, जो 2017 से हो रहा है। अप्रकटीकरण पर काला धन अधिनियम 2015 के तहत 30% कर और ₹ 10 लाख प्रति वर्ष के दंड का प्रावधान है।
NRI-काल में ली गई पॉलिसी का प्रीमियम भारत लौटने के बाद भारतीय खाते से भर सकते हैं?
विनियम 4(ii) पॉलिसी को रखने की अनुमति देता है, नए प्रेषण की नहीं। व्यवसायी विश्लेषण के अनुसार लौटने के बाद भारतीय निवासी निधियों से ऐसी पॉलिसी का प्रीमियम भरना FEMA का उल्लंघन माना जा सकता है। सुरक्षित योजना यह है कि सभी किस्तें लौटने से पहले या विदेशी खातों की उन निधियों से पूरी हों जिन पर FEMA लागू नहीं है, और इस पर FEMA सलाहकार से लिखित पुष्टि ली जाए।
स्रोत और प्राधिकार
Foreign Exchange Management (Insurance) Regulations, 2015, अधिसूचना FEMA 12(R)/2015-RB, विनियम 3, 4 और 4(ii) (RBI)। RBI Master Direction on Liberalised Remittance Scheme और LRS FAQ (RBI)। आयकर अधिनियम 1961, धारा 10(10D) और उसके परंतुक (incometaxindia.gov.in)। CBDT Guidance Note on FATCA and CRS, धारा 285BA और नियम 114F से 114H (incometaxindia.gov.in)। ITAT मुंबई, Taragauri T. Doshi v ITO, ITA 549/Mum/2010 (12 मार्च 2012) और ITAT दिल्ली, Sarvesh Naidu v DDIT (11 अगस्त 2026), द्वितीयक सारांशों के माध्यम से। TCS सीमा और दरें, धारा 56(2)(xiii), नियम 11UACA और Schedule FA की तालिका का नाम द्वितीयक व्यवसायी स्रोतों से लिए गए हैं और प्राथमिक पाठ से हमने उनकी पुष्टि नहीं की है। Income-tax Act 2025 (अधिनियम 30 of 2025) 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी है; 1961 की धाराओं के 2025 समतुल्य की पुष्टि आपके कर सलाहकार से कराएँ।
हमारे संपादकीय मानक बताते हैं कि इस तरह के लेख कैसे प्रलेखित और जाँचे जाते हैं।
यह लेख केवल सूचना के लिए है। यह कानूनी, कर, निवेश या बीमा संबंधी सलाह नहीं है। नियम बदलते रहते हैं और उनका प्रयोग हर मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। कोई भी निर्णय लेने से पहले किसी योग्य पेशेवर से परामर्श करें।

Eldar PPLI.com की रणनीति, शोध और साझेदारियों का नेतृत्व करते हैं। उन्होंने 2020 में PPLI.com का अधिग्रहण किया और तब से प्राइवेट प्लेसमेंट लाइफ इंश्योरेंस पर काम कर रहे हैं।
अपना प्रश्न, निवास का देश और जिस निर्णय पर विचार कर रहे हैं, उसे बताएँ। मेडिकल रिकॉर्ड, पहचान पत्र या खाते के पासवर्ड न भेजें। व्यक्तिगत जानकारी भेजने से पहले गोपनीयता नीति पढ़ें। प्रश्न समझाने के लिए जितनी जानकारी जरूरी हो, उतनी ही साझा करें।
एक ही प्रश्न से शुरू करना चाहते हैं? लिखें info@ppli.com