भारत लौटने से पहले: NRI के लिए PPLI, RNOR विंडो और Reg. 4(ii)
सिंगापुर में पंद्रह साल बिताने के बाद एक परिवार बेंगलुरु लौटने की तैयारी कर रहा है। बच्चों की पढ़ाई, बुज़ुर्ग माता-पिता, और भारत में बढ़ता कारोबार, सब उसी दिशा में इशारा करते हैं। परिवार के पास सिंगापुर और स्विट्ज़रलैंड के बैंकों में एक बड़ा पोर्टफोलियो है, जिस पर अब तक कहीं कोई पूंजीगत लाभ कर नहीं लगा। लौटने की तारीख तय होते ही उनके CA का एक ही वाक्य सबकुछ बदल देता है: "जिस दिन आप सामान्य निवासी बनेंगे, उस दिन से आपकी दुनिया भर की आय भारत में कर योग्य होगी।"
यह लेख उसी क्षण के लिए है। यह भारत लौटने वाले NRI के दृष्टिकोण से PPLI की योजना को समय की धुरी पर रखता है: विदेश में रहते हुए पॉलिसी लेना, FEMA के विनियम 4(ii) के तहत लौटने के बाद रखना, RNOR के दो से तीन वर्षों की खिड़की का उपयोग, और उसके बाद सामान्य निवासी के रूप में प्रकटीकरण और निकासी की योजना। पॉलिसी की यांत्रिकी यहाँ दोहराई नहीं गई है; वह PPLI कैसे काम करता है में है। यह लेख PPLI रणनीति श्रेणी में है और इसकी पृष्ठभूमि PPLI पिलर पृष्ठ पर है।
भारत से जुड़े परिवारों के लिए सबसे मज़बूत और ईमानदार मामला
इस साइट के भारतीय खंड में हम एक बात बार-बार कहते हैं: भारत का सामान्य निवासी नई विदेशी जीवन बीमा पॉलिसी RBI की अनुमति के बिना नहीं ले सकता, और LRS उसका रास्ता नहीं है। इसी कारण भारत से जुड़े परिवारों के लिए PPLI का सबसे मज़बूत मामला निवासी का नहीं, बल्कि NRI का है, और उसमें भी उस NRI का जो किसी दिन लौटने की सोच रहा है।
तर्क तीन हिस्सों में है। पहला, NRI की विदेशी कमाई पर FEMA लागू नहीं होता, क्योंकि FEMA भारत में निवासी व्यक्ति को विनियमित करता है; इसलिए NRI विदेश में रहते हुए किसी भी आकार की पॉलिसी विदेशी निधियों से ले सकता है। दूसरा, Foreign Exchange Management (Insurance) Regulations, 2015 का विनियम 4(ii) स्पष्ट शब्दों में कहता है कि भारत में निवासी व्यक्ति भारत के बाहर के बीमाकर्ता की ऐसी किसी भी जीवन बीमा पॉलिसी को रख सकता है जो उसने भारत के बाहर निवासी रहते हुए ली थी। यह सत्यापित प्राथमिक पाठ है। तीसरा, लौटने के बाद आयकर अधिनियम की धारा 6(6) के तहत RNOR की स्थिति दो से तीन वर्षों तक मिल सकती है, जिसमें भारत के बाहर उत्पन्न और प्राप्त आय भारत में कर योग्य नहीं है।
इन तीनों को जोड़ें तो एक ऐसी योजना बनती है जो कानून के पाठ पर टिकी है, किसी कर-बचत की चालाकी पर नहीं: विदेश में रहते हुए पॉलिसी को पूरी तरह वित्तपोषित करें, लौटने के बाद उसे रखें, RNOR के वर्षों में ज़रूरी निकासी विदेश में ही करें, और सामान्य निवासी बनने के बाद पॉलिसी को स्थगन और उत्तराधिकार के साधन के रूप में चलने दें।
आप कब "निवासी" बनते हैं: धारा 6 का हिसाब
आयकर अधिनियम 1961 की धारा 6(1) (1961 अधिनियम; 2025 अधिनियम में समतुल्य धारा 6, जिसकी पुष्टि कर सलाहकार से कराएँ) के अनुसार कोई व्यक्ति उस वित्तीय वर्ष में निवासी है जब वह भारत में 182 दिन या अधिक रहा हो, या उस वर्ष 60 दिन या अधिक और पिछले चार वर्षों में कुल 365 दिन या अधिक रहा हो। भारतीय नागरिक या भारतीय मूल का व्यक्ति जो भारत आता है और जिसकी भारतीय स्रोत की आय ₹ 15 लाख से अधिक है, उसके लिए 60 दिन की सीमा 120 दिन हो जाती है (वित्त अधिनियम 2020 का स्पष्टीकरण 1(b))। धारा 6(1A) एक "deemed resident" नियम जोड़ती है: ₹ 15 लाख से अधिक भारतीय आय वाला भारतीय नागरिक जो निवास या अधिवास के कारण किसी और देश में कर के लिए दायी नहीं है, वह भारत का निवासी माना जाता है।
ये नियम द्वितीयक स्रोतों से पुष्ट हैं और आपकी वास्तविक स्थिति दिन-गिनती पर निर्भर करती है। लौटने की योजना बनाते समय पहला काम यह है कि आगमन की तारीख को इस तरह रखा जाए कि पहले वर्ष में आप या तो अनिवासी रहें या स्पष्ट रूप से RNOR बनें। लौटने से पहले के वर्ष में भारत की लंबी यात्राएँ इस गणना को बिगाड़ सकती हैं; 120 दिन का नियम विशेष रूप से उन NRI व्यवसायियों को पकड़ता है जिनकी भारत में किराये या लाभांश की आय ₹ 15 लाख से ऊपर है।
RNOR: दो से तीन वर्षों की खिड़की
धारा 6(6) के अनुसार निवासी व्यक्ति "resident but not ordinarily resident" (RNOR) है यदि वह पिछले दस वर्षों में से नौ में अनिवासी रहा हो, या पिछले सात वर्षों में भारत में कुल 729 दिन या उससे कम रहा हो। इसके अलावा 6(1A) के तहत deemed resident और 120 से 181 दिन वाले ₹ 15 लाख से अधिक आय वाले नागरिक भी RNOR माने जाते हैं। दस में से नौ वर्ष अनिवासी रहने वाला व्यक्ति, जो एक अप्रैल के आसपास लौटता है, व्यवसायी विश्लेषण के अनुसार सामान्यतः दो से तीन कर वर्षों तक RNOR रहता है। सटीक संख्या आपके पिछले सात और दस वर्षों की दिन-गिनती से तय होती है, इसलिए इसे CA के साथ वर्ष-दर-वर्ष निकालें।
RNOR की स्थिति का असर धारा 5(1) के परंतुक से आता है: RNOR के लिए भारत के बाहर उत्पन्न या उद्भूत आय भारत में कर योग्य नहीं है, जब तक वह भारत में नियंत्रित व्यवसाय या भारत में स्थापित पेशे से न आती हो। ध्यान दें, विदेश में उत्पन्न लेकिन भारत में प्राप्त आय कर योग्य है। इसलिए RNOR के वर्षों में विदेशी पॉलिसी से आंशिक सरेंडर या निकासी विदेशी खाते में ही ली जानी चाहिए, भारतीय खाते में नहीं, और उस समय उस राशि को भारत लाने की जल्दी नहीं करनी चाहिए।
दूसरा असर प्रकटीकरण पर है। व्यवसायी मार्गदर्शिकाओं के अनुसार Schedule FA केवल सामान्य निवासी (ROR) के लिए है; RNOR और अनिवासी को इसे भरने की आवश्यकता नहीं है। इसका अर्थ यह नहीं कि पॉलिसी अदृश्य है, क्योंकि CRS की रिपोर्टिंग बीमाकर्ता के देश से भारत को RNOR के वर्षों में भी आती रहती है। अर्थ केवल इतना है कि आपकी अपनी ITR में विदेशी संपत्ति की तालिका उस वर्ष से शुरू होती है जिस वर्ष आप ROR बनते हैं।
लौटने से पहले: पॉलिसी को पूरी तरह वित्तपोषित करें
यहाँ सबसे बड़ी व्यावहारिक गलती होती है। विनियम 4(ii) पॉलिसी को रखने की अनुमति देता है, नए प्रेषण की नहीं। लौटने के बाद आप भारत में निवासी हैं और भारत से विदेशी जीवन बीमा प्रीमियम भेजना उसी विनियम 4 के दायरे में आ जाता है जो नई पॉलिसी के लिए RBI की अनुमति माँगता है; एक चार्टर्ड अकाउंटेंट का प्रकाशित विश्लेषण इसे सीधे FEMA का उल्लंघन कहता है। हमने इस पर RBI का कोई स्पष्टीकरण नहीं देखा, इसलिए इसे व्यवसायी दृष्टिकोण के रूप में लें, लेकिन योजना ऐसी बनाएँ कि यह प्रश्न उठे ही नहीं।
अपना PPLI संबंधी प्रश्न और उससे जुड़े देशों के नाम बताएँ, ताकि बातचीत सही विषय से शुरू हो सके।
अपना प्रश्न बताएँ →व्यावहारिक नियम: लौटने की तारीख से पहले पॉलिसी एकमुश्त प्रीमियम से, या सभी किस्तों के साथ, पूरी तरह वित्तपोषित हो। यदि पॉलिसी में भविष्य के प्रीमियम की गुंजाइश रखनी है, तो वह उन विदेशी निधियों से हो जो लौटने के बाद भी विदेशी खातों में रहेंगी और जिन पर FEMA की स्थिति आपके सलाहकार ने लिखित रूप में स्पष्ट की हो। मौजूदा विदेशी पोर्टफोलियो को नकद में बदलकर या in-kind हस्तांतरण से पॉलिसी में डालने का प्रश्न निवेश लचीलापन श्रेणी के लेख "मौजूदा विदेशी पोर्टफोलियो को PPLI में ले जाना" में अलग से है।
एक और बिंदु जो लौटने से पहले तय होना चाहिए: पॉलिसी का स्वामी कौन है। यदि पॉलिसी व्यक्ति के अपने नाम पर है तो लौटने के बाद वह उसकी विदेशी संपत्ति है और Schedule FA में आती है। यदि पॉलिसी लौटने से पहले स्थापित विदेशी ट्रस्ट के नाम पर है तो प्रश्न ट्रस्ट की कर स्थिति का है, और भारतीय आयकर में विदेशी ट्रस्ट का व्यवहार एक अलग और जटिल विषय है जिस पर यह लेख कोई निष्कर्ष नहीं देता। बस इतना कहें कि यह निर्णय लौटने के बाद नहीं बदला जा सकता, इसलिए यह पहले लिया जाना चाहिए।
लौटने के बाद, RNOR के वर्षों में: निकासी की योजना
RNOR की खिड़की पॉलिसी के लिए किस तरह उपयोगी है, यह पॉलिसी की प्रकृति पर निर्भर करता है। यदि आपने PPLI को दीर्घकालिक उत्तराधिकार साधन के रूप में लिया है और उससे निकासी की कोई योजना नहीं है, तो RNOR खिड़की का उपयोग पॉलिसी के लिए नहीं बल्कि आपके शेष विदेशी पोर्टफोलियो के लिए होगा: उस पोर्टफोलियो में जमा अवास्तविक लाभ को RNOR वर्षों में विदेश में ही वास्तविक करना, ताकि ROR बनने के बाद वह लाभ भारतीय कर के दायरे में न आए।
यदि पॉलिसी से आपको लौटने के बाद के पहले वर्षों में तरलता चाहिए, जैसे भारत में घर खरीदने या व्यवसाय में पूंजी लगाने के लिए, तो वह आंशिक सरेंडर RNOR के वर्षों में, विदेशी खाते में, करना तर्कसंगत है। धारा 5(1) के परंतुक के तहत वह राशि, भारत के बाहर उत्पन्न और प्राप्त होने के कारण, भारत में कर योग्य नहीं होगी। बाद में उस राशि को भारत लाना एक पूंजी हस्तांतरण है, आय नहीं। इस क्रम में समय और स्थान दोनों निर्णायक हैं, और इसे लिखित कर राय के बिना नहीं करना चाहिए, क्योंकि "प्राप्त" शब्द की व्याख्या और बैंकिंग निर्देशों का विवरण मामले के अनुसार बदल सकता है।
एक उदाहरण, स्पष्ट रूप से काल्पनिक: मान लीजिए कोई व्यक्ति 1 अप्रैल 2027 को दुबई से लौटता है और दस में से नौ वर्ष अनिवासी रहा है। मान लीजिए उसकी दिन-गिनती उसे वित्तीय वर्ष 2027-28 और 2028-29 में RNOR बनाती है। उसकी सिंगापुर की पॉलिसी में जमा लाभ है। यदि वह मार्च 2029 तक पॉलिसी से आंशिक सरेंडर अपने सिंगापुर खाते में लेता है, तो धारा 5(1) के परंतुक के अनुसार वह राशि भारत में कर योग्य नहीं है। यदि वही सरेंडर अप्रैल 2029 में ROR बनने के बाद होता है, तो प्राप्त राशि में से प्रीमियम घटाकर शेष अन्य स्रोतों से आय के रूप में स्लैब दर पर कर योग्य होगा। अंतर केवल तारीख का है, और यही इस लेख का मूल संदेश है।
ROR बनने के बाद: स्थगन, प्रकटीकरण और मृत्यु लाभ
सामान्य निवासी बनने के बाद धारा 5(1) के तहत आपकी दुनिया भर की आय भारत में कर योग्य है। पॉलिसी के लिए इसका अर्थ तीन बातों में है।
पहली, स्थगन जारी रहता है। धारा 56(2)(xiii) और धारा 45(1B) "प्राप्त" राशि पर कर लगाती हैं, और नियम 11UACA तथा 8AD की गणना प्राप्ति के समय होती है। पॉलिसी के भीतर हर वर्ष होने वाली वृद्धि पर वार्षिक कर लगाने वाली कोई CBDT स्थिति या भारतीय निर्णय हमें नहीं मिला। इस अनुपस्थिति को पुष्टि न मानें; वर्तमान प्रभार प्रावधानों की भाषा "प्राप्ति पर कर" की है और इसी आधार पर लिखित राय लें। दूसरी, 1 अप्रैल 2023 के बाद जारी पॉलिसी में ₹ 5 लाख (ULIP-प्रकार में ₹ 2.5 लाख) से अधिक वार्षिक प्रीमियम होने पर धारा 10(10D) की छूट सरेंडर या मैच्योरिटी पर नहीं मिलती; PPLI के पैमाने पर यह हर हाल में लागू है। इसलिए ROR के रूप में कोई भी निकासी कर योग्य होगी, प्रीमियम घटाकर, स्लैब दर पर। तीसरी, मृत्यु लाभ 10(10D) के आठवें परंतुक के तहत प्रीमियम के आकार की परवाह किए बिना कर-मुक्त रहता है। विदेशी बीमाकर्ता की पॉलिसी पर 10(10D) की प्रयोज्यता ITAT मुंबई (Doshi, 2012) और ITAT दिल्ली (Naidu, अगस्त 2026) के निर्णयों में स्वीकार हुई है; ये अधिकरण के निर्णय हैं, स्थापित कानून नहीं।
Naidu का मामला इस लेख के पाठक के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है, क्योंकि द्वितीयक सारांश के अनुसार वह एक लौटे हुए NRI की Isle of Man की पॉलिसी का मामला था, जो दुबई में 2005 में ली गई, जिसके प्रीमियम भारत से जारी रहे और जो 2016 में परिपक्व हुई; अधिकरण ने उसे काला धन अधिनियम के तहत "undisclosed foreign asset" नहीं माना और 10(10D) की छूट दी। हम इसे एक उत्साहजनक संकेत के रूप में उद्धृत करते हैं, न कि उस पैमाने की पॉलिसी के लिए मार्गदर्शन के रूप में जिस पर 2023 के बाद की प्रीमियम सीमाएँ लागू होती हैं।
प्रकटीकरण: ROR बनने के पहले वर्ष से Schedule FA में पॉलिसी का विवरण, व्यवसायी मार्गदर्शिकाओं के अनुसार "Foreign Cash Value Insurance Contract" की तालिका में, कैलेंडर वर्ष के आधार पर, cash या surrender value के साथ देना होगा। इसे न भरने का परिणाम काला धन अधिनियम 2015 का 30% कर और ₹ 10 लाख प्रति वर्ष का दंड है; वित्त (सं. 2) अधिनियम 2024 के बाद ₹ 20 लाख तक की कुल विदेशी संपत्ति (अचल संपत्ति को छोड़कर) पर दंड नहीं लगता, जो PPLI पैमाने पर अप्रासंगिक है। इस पर पूरा लेख CRS और Schedule FA है।
मेज़बान देश का पक्ष: दुबई, सिंगापुर, लंदन, न्यूयॉर्क
लौटने से पहले की योजना केवल भारत के कानून की नहीं है; जिस देश से आप लौट रहे हैं उसका कानून भी पॉलिसी के अधिग्रहण और निकास को प्रभावित करता है।
UAE में व्यक्तियों पर आयकर नहीं है; कॉर्पोरेट कर 9% केवल AED 3,75,000 से ऊपर की कर योग्य व्यावसायिक आय पर है और वेतन तथा व्यक्तिगत निवेश आय उसके दायरे से बाहर है। इसलिए दुबई से लौटने वाले के लिए पॉलिसी लेने का कोई स्थानीय कर बिंदु नहीं है, और पूरी योजना भारत के समय-निर्धारण पर टिकी है। सिंगापुर में पूंजीगत लाभ कर नहीं है और 15 फरवरी 2008 के बाद की मृत्यु पर संपदा शुल्क समाप्त है; वहाँ से लौटने वाले के लिए स्थिति दुबई जैसी ही सरल है। इन दोनों क्षेत्राधिकारों में बीमाकर्ता चुनने का प्रश्न सिंगापुर बनाम लक्ज़मबर्ग में है।
ब्रिटेन से लौटने वाला अधिक जटिल स्थिति में है। द्वितीयक स्रोतों के अनुसार 6 अप्रैल 2025 से non-dom व्यवस्था समाप्त हो गई है, उसकी जगह चार वर्ष की FIG व्यवस्था है, और विरासत कर अब निवास-आधारित है: पिछले बीस में से दस कर वर्ष ब्रिटेन में रहने वाला "long-term resident" अपनी दुनिया भर की संपत्ति पर विरासत कर के दायरे में है, और छोड़ने के बाद भी तीन से दस वर्ष की "पूँछ" रहती है। लंदन से लौटने वाले भारतीय के लिए इसका अर्थ यह है कि PPLI की योजना भारत लौटने के बाद भी ब्रिटेन के विरासत कर से प्रभावित हो सकती है, और ब्रिटेन में रहते हुए विदेशी पॉलिसी पर chargeable-event व्यवस्था लागू होती है जिसका विवरण हमने यहाँ नहीं जाँचा है; ब्रिटेन के सलाहकार से अलग राय लें।
अमेरिका से लौटने वाला, यदि वह US person बना रहता है (नागरिक या green card धारक), तो उसे ऐसी पॉलिसी चाहिए जो IRC §7702 की परिभाषा पूरी करे; अन्यथा पॉलिसी के भीतर की वार्षिक आय अमेरिका में कर योग्य है। इसके अलावा PFIC नियम और विदेशी बीमाकर्ता को दिए गए प्रीमियम पर 1% संघीय उत्पाद शुल्क (§4371) का प्रश्न है। ऐसे परिवारों के लिए क्षेत्राधिकार का चुनाव क्षेत्राधिकार श्रेणी के बरमूडा और केमैन वाले लेख में है। भारत लौटने से US person की स्थिति नहीं बदलती, इसलिए यहाँ दोनों देशों की योजना एक साथ चलनी चाहिए।
DTAA और TRC
NRI के रूप में आप भारत में केवल भारतीय स्रोत की आय पर कर देते हैं (धारा 5(2), धारा 9) और धारा 90 के तहत, Tax Residency Certificate के साथ, दोहरे कराधान से बचाव संधि (DTAA) की राहत ले सकते हैं। भारत की सिंगापुर, लक्ज़मबर्ग, UAE और ब्रिटेन के साथ DTAA मौजूद हैं। इस लेख में हम उन संधियों के बीमा-विशिष्ट प्रावधानों पर कोई दावा नहीं करते; केवल यह कि लौटने के बाद, जब आप भारत के निवासी होंगे, बीमाकर्ता के देश और भारत के बीच की संधि यह तय कर सकती है कि पॉलिसी भुगतान पर कहाँ और कैसे कर लगेगा। यह प्रश्न बीमाकर्ता चुनने से पहले उठना चाहिए, बाद में नहीं।
भारत में उत्तराधिकार: कर नहीं, प्रक्रिया
भारत में संपदा शुल्क 16 मार्च 1985 के बाद की मृत्यु पर लागू नहीं है, विरासत कर नहीं है और उपहार कर अधिनियम 1 अक्टूबर 1998 के बाद के उपहारों पर लागू नहीं होता; धारा 56(2)(x) के तहत ₹ 50,000 से अधिक बिना प्रतिफल प्राप्त राशि प्राप्तकर्ता की आय है, लेकिन रिश्तेदारों से, वसीयत या विरासत से प्राप्त राशि उसके अपवाद में है। इसलिए लौटने वाले NRI के लिए PPLI का उत्तराधिकार मूल्य कर-बचत में नहीं है। वह प्रक्रिया में है: मृत्यु लाभ बीमा अनुबंध के तहत लाभार्थी को सीधे जाता है, वसीयत, probate या उत्तराधिकार प्रमाणपत्र से नहीं गुज़रता; विदेशी संपत्तियों के लिए विदेशी अदालतों की प्रक्रिया से बचता है; और लाभार्थी की पहचान अनुबंध में पहले से तय है। इन विषयों पर उत्तराधिकार नियोजन पृष्ठ में विस्तार है।
यह क्या नहीं है
यह योजना भारत के निवासी के लिए नहीं है जो कभी NRI नहीं रहा; उसके लिए विनियम 4 का द्वार बंद है और यह लेख उसे कोई चोर दरवाज़ा नहीं देता। यह RNOR के वर्षों को "कर-मुक्त छुट्टी" के रूप में भी प्रस्तुत नहीं करता: भारतीय स्रोत की आय और भारत में प्राप्त विदेशी आय RNOR के लिए भी कर योग्य है, और भारत में नियंत्रित व्यवसाय से होने वाली विदेशी आय भी। यह Schedule FA या CRS से बचने का साधन नहीं है; RNOR के वर्षों में Schedule FA न भरना कानून का पालन है, उसकी चोरी नहीं, और CRS की रिपोर्टिंग उन वर्षों में भी चलती रहती है। और यह लेख आपकी दिन-गिनती नहीं कर सकता; वह गिनती, और उससे निकलने वाला RNOR का ठीक-ठीक काल, आपके CA का काम है, और उसी पर पूरी योजना टिकी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
NRI रहते हुए ली गई PPLI पॉलिसी क्या भारत लौटने के बाद रखी जा सकती है?
हाँ। FEMA 12(R)/2015-RB का विनियम 4(ii) कहता है कि भारत में निवासी व्यक्ति भारत के बाहर के बीमाकर्ता की ऐसी जीवन बीमा पॉलिसी को रख सकता है जो उसने भारत के बाहर निवासी रहते हुए ली थी। इसके लिए RBI की अलग अनुमति की आवश्यकता नहीं है। अनुमति रखने की है, लौटने के बाद भारत से नया प्रीमियम भेजने की नहीं; इसलिए पॉलिसी लौटने से पहले पूरी तरह वित्तपोषित होनी चाहिए।
RNOR की स्थिति कितने वर्षों तक मिलती है?
धारा 6(6) के अनुसार वह व्यक्ति RNOR है जो पिछले दस वर्षों में से नौ में अनिवासी रहा हो या पिछले सात वर्षों में भारत में 729 दिन या उससे कम रहा हो। व्यवसायी विश्लेषण के अनुसार लंबे समय से अनिवासी रहा व्यक्ति लौटने के बाद सामान्यतः दो से तीन कर वर्षों तक RNOR रहता है। सटीक अवधि आपकी पिछले सात और दस वर्षों की दिन-गिनती पर निर्भर करती है और इसे CA से वर्ष-दर-वर्ष निकलवाएँ।
RNOR के वर्षों में पॉलिसी से निकाली गई राशि पर भारत में कर लगेगा?
धारा 5(1) के परंतुक के अनुसार RNOR के लिए भारत के बाहर उत्पन्न या उद्भूत आय भारत में कर योग्य नहीं है, बशर्ते वह भारत में नियंत्रित व्यवसाय या भारत में स्थापित पेशे से न आए। विदेशी पॉलिसी से आंशिक सरेंडर की राशि, यदि विदेशी खाते में प्राप्त हो, इसी दायरे में आती है। भारत में प्राप्त विदेशी आय कर योग्य है, इसलिए निकासी विदेशी खाते में लें और इस पर लिखित कर राय रखें।
क्या RNOR को Schedule FA भरना होता है?
व्यवसायी मार्गदर्शिकाओं के अनुसार Schedule FA केवल सामान्य निवासी (ROR) के लिए है; RNOR और अनिवासी को इसे भरने की आवश्यकता नहीं है। जिस वर्ष आप ROR बनते हैं, उस वर्ष से पॉलिसी का cash या surrender value कैलेंडर वर्ष के आधार पर Schedule FA की विदेशी cash value insurance contract वाली तालिका में देना होगा। CRS के तहत बीमाकर्ता के देश से भारत को रिपोर्टिंग RNOR के वर्षों में भी होती रहती है।
ROR बनने के बाद पॉलिसी के भीतर की वृद्धि पर हर साल कर देना होगा?
धारा 56(2)(xiii) और 45(1B) "प्राप्त" राशि पर कर लगाती हैं और नियम 11UACA तथा 8AD की गणना प्राप्ति पर होती है। पॉलिसी के भीतर की अवास्तविक वृद्धि पर वार्षिक कर लगाने वाली कोई CBDT स्थिति या भारतीय निर्णय हमें नहीं मिला। इस अनुपस्थिति को पुष्टि न मानें; वर्तमान प्रावधानों की भाषा प्राप्ति पर कर की है, और इसी आधार पर लिखित राय लें। ROR के रूप में निकासी पर प्रीमियम घटाकर शेष राशि स्लैब दर पर कर योग्य होगी।
भारत लौटने के बाद मृत्यु लाभ पर कर लगेगा?
धारा 10(10D) के आठवें परंतुक के अनुसार मृत्यु पर प्राप्त राशि पर प्रीमियम सीमाओं वाले परंतुक लागू नहीं होते, इसलिए मृत्यु लाभ कर-मुक्त रहता है। विदेशी बीमाकर्ता की पॉलिसी पर 10(10D) की प्रयोज्यता ITAT मुंबई (Doshi, 2012) और ITAT दिल्ली (Naidu, 2026) में स्वीकार हुई है, जो अधिकरण के निर्णय हैं। भारत में संपदा शुल्क या विरासत कर नहीं है, इसलिए मृत्यु लाभ पर कोई अलग कर भी नहीं है।
लौटने के बाद भारतीय खाते से पॉलिसी का प्रीमियम भर सकते हैं?
विनियम 4(ii) केवल पॉलिसी रखने की अनुमति देता है। लौटने के बाद आप भारत में निवासी हैं, और एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के प्रकाशित विश्लेषण के अनुसार भारतीय निवासी निधियों से विदेशी जीवन बीमा का प्रीमियम भरना FEMA का उल्लंघन है। हमने इस पर RBI का स्पष्टीकरण नहीं देखा। सुरक्षित रास्ता यह है कि पॉलिसी लौटने से पहले एकमुश्त या सभी किस्तों के साथ पूरी तरह वित्तपोषित हो।
ब्रिटेन या अमेरिका से लौटने वाले के लिए क्या अलग है?
ब्रिटेन में द्वितीयक स्रोतों के अनुसार 6 अप्रैल 2025 से विरासत कर निवास-आधारित है और बीस में से दस वर्ष रहने वाले पर छोड़ने के बाद भी तीन से दस वर्ष की "पूँछ" लागू रहती है, इसलिए भारत लौटने के बाद भी ब्रिटेन का विरासत कर पॉलिसी को छू सकता है। अमेरिका का नागरिक या green card धारक लौटने के बाद भी US person रहता है और उसे §7702 के अनुरूप पॉलिसी चाहिए, साथ में PFIC और 1% उत्पाद शुल्क के प्रश्न। दोनों में मेज़बान देश के सलाहकार की अलग राय आवश्यक है।
स्रोत और प्राधिकार
Foreign Exchange Management (Insurance) Regulations, 2015, FEMA 12(R)/2015-RB, विनियम 4 और 4(ii) (RBI)। आयकर अधिनियम 1961, धारा 5, 6(1), 6(1A), 6(6) और 10(10D) (incometaxindia.gov.in; धारा 6 के नियम द्वितीयक स्रोतों से पुष्ट, प्राथमिक पृष्ठ इस सत्र में खुला नहीं)। UAE सरकार का कराधान पृष्ठ (u.ae)। IRAS, Estate Duty (iras.gov.sg)। ब्रिटेन की non-dom सुधार पर KPMG UK का सारांश और अमेरिकी §7702 तथा §4371 पर द्वितीयक स्रोत। ITAT मुंबई, Taragauri T. Doshi v ITO (2012) और ITAT दिल्ली, Sarvesh Naidu v DDIT (11 अगस्त 2026), द्वितीयक सारांशों के माध्यम से; Naidu की ITA संख्या और पूरा तर्क हमने नहीं देखा। RNOR की "दो से तीन वर्ष" की अवधि, Schedule FA की RNOR-छूट और लौटने के बाद प्रीमियम पर FEMA का दृष्टिकोण व्यवसायी विश्लेषण हैं। Income-tax Act 2025 (अधिनियम 30 of 2025) 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी है; 1961 की धाराओं के 2025 समतुल्य की पुष्टि कर सलाहकार से कराएँ।
हमारे संपादकीय मानक बताते हैं कि इस तरह के लेख कैसे प्रलेखित और जाँचे जाते हैं।
यह लेख केवल सूचना के लिए है। यह कानूनी, कर, निवेश या बीमा संबंधी सलाह नहीं है। नियम बदलते रहते हैं और उनका प्रयोग हर मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। कोई भी निर्णय लेने से पहले किसी योग्य पेशेवर से परामर्श करें।

Eldar PPLI.com की रणनीति, शोध और साझेदारियों का नेतृत्व करते हैं। उन्होंने 2020 में PPLI.com का अधिग्रहण किया और तब से प्राइवेट प्लेसमेंट लाइफ इंश्योरेंस पर काम कर रहे हैं।
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