PPLI बनाम ULIP: ₹2.5 लाख की सीमा और GIFT City की डॉलर पॉलिसी
मान लीजिए दिल्ली के एक परिवार के सामने एक ही महीने में तीन प्रस्ताव हैं। बैंक का relationship manager ULIP लेकर आया है, हर साल ₹10 लाख डालने की बात के साथ। दुबई में बसा भाई सिंगापुर की एक PPLI पॉलिसी की चर्चा कर रहा है। एक सलाहकार GIFT City से डॉलर वाले जीवन बीमा की प्रस्तुति छोड़ गया है। तीनों “बीमा के भीतर निवेश” की भाषा बोलते हैं, तो परिवार उन्हें एक ही तालिका में रखकर अनुमानित रिटर्न मिलाने बैठ जाता है।
गड़बड़ यहीं से शुरू होती है। रिटर्न देखने से पहले यह देखिए कि इनमें से कौन-सा रास्ता आपके लिए कानूनन खुला है। उसके बाद कर का हिसाब आता है, और लागत सबसे आख़िर में। नीचे यही क्रम रखा गया है, अक्टूबर 2026 के नियमों के अनुसार।
तीन नाम, तीन अलग चीज़ें
ULIP एक उत्पाद श्रेणी है। इसे भारतीय जीवन बीमा कंपनी IRDAI के नियमों के तहत बेचती है। प्रीमियम से शुल्क कटने के बाद बचा हिस्सा बीमाकर्ता के तय फंडों में जाता है, और निवेश का जोखिम पॉलिसीधारक का होता है। फंड आप बदल सकते हैं, लेकिन चुनना उन्हीं में से होगा जो बीमाकर्ता ने बनाए हैं।
PPLI एक व्यवस्था का नाम है। आम तौर पर लक्ज़मबर्ग, आयरलैंड, सिंगापुर या बरमूडा जैसे क्षेत्राधिकार का बीमाकर्ता बड़ी राशि के लिए निजी प्लेसमेंट से पॉलिसी जारी करता है। उसके भीतर कौन निवेश प्रबंधक काम करेगा और कौन-सी परिसंपत्तियाँ रहेंगी, यह बीमाकर्ता की स्वीकृति से तय होता है। पूरी संरचना हमारे PPLI कैसे काम करता है वाले लेख में समझाई गई है।
GIFT City एक जगह है, और साथ में एक नियामकीय ढाँचा भी। वहाँ IFSCA के तहत काम करने वाले IFSC Insurance Office (IIO) विदेशी मुद्रा में पॉलिसी जारी कर सकते हैं। मसलन LIC का IFSC कार्यालय “LIC's Wealth Builder Plus” नाम का USD वाला जीवन बीमा समाधान बताता है, जिसके सभी लाभ USD में देय हैं। ध्यान रखिए, GIFT City से आई हर पॉलिसी PPLI नहीं होती। ULIP के कर नियम भी उस पर अपने आप लागू नहीं होते।
ULIP में पैसा पाँच साल बँधता है, और कर छूट ₹2.5 लाख पर रुकती है
पहली सीमा तरलता की है। IRDAI की उपभोक्ता जानकारी बताती है कि ULIP की लॉक-इन अवधि तीन से बढ़ाकर पाँच वर्ष की गई, ताकि उत्पाद लंबी अवधि और सुरक्षा वाला बना रहे। शुल्कों को लॉक-इन के वर्षों में फैलाने और discontinuance शुल्क पर सीमा रखने की व्यवस्था भी इन्हीं नियमों में है।
दूसरी सीमा कर की है, और बड़ी पूँजी वाले परिवार का फ़ैसला असल में इसी से होता है। आयकर अधिनियम 1961 की धारा 10(10D) का परंतुक कहता है कि 1 फरवरी 2021 को या उसके बाद जारी किसी ULIP में किसी भी वर्ष देय प्रीमियम ₹2,50,000 से अधिक हो, तो परिपक्वता या सरेंडर की राशि छूट से बाहर हो जाती है। आपके पास कई ULIP हैं तो सीमा सबके कुल प्रीमियम पर लगेगी। मृत्यु पर मिलने वाली राशि पर इस शर्त का असर नहीं पड़ता। गैर-ULIP पॉलिसियों के लिए अलग सीमा ₹5 लाख है, जो 1 अप्रैल 2023 से जारी पॉलिसियों पर लागू है।
सीमा से ऊपर वाली ULIP के साथ क्या होगा, यह वित्त अधिनियम 2025 के ज्ञापन ने लिखकर साफ़ किया। ऐसी ULIP पूँजीगत संपत्ति है। उसे भुनाने पर लाभ पूँजीगत लाभ के रूप में कर योग्य है, और वह equity oriented fund की परिभाषा में शामिल है।
1 अप्रैल 2026 से Income-tax Act 2025 लागू है, इसलिए धाराओं के क्रमांक बदल गए हैं। पुराने और नए संदर्भों का मिलान हमारे Income-tax Act 2025 वाले लेख में है। आपकी पॉलिसी पर नए अधिनियम का कौन-सा प्रावधान लगेगा, यह CA से लिखित में लें।
₹3 लाख सालाना प्रीमियम पर हिसाब
यह सिर्फ़ गणना का उदाहरण है। मान लें कि एक निवासी व्यक्ति 2026 में ULIP लेता है और दस वर्ष तक हर साल ₹3,00,000 प्रीमियम भरता है, कुल ₹30 लाख। दसवें वर्ष के बाद फंड मूल्य ₹48 लाख है। प्रीमियम ₹2.5 लाख से अधिक था, इसलिए ₹18 लाख का लाभ छूट से बाहर है। अब मान लें कि फंड equity oriented है, एक वर्ष से अधिक रखा गया है, और उस वर्ष उसका कोई दूसरा दीर्घकालिक equity लाभ नहीं है। आज की 12.5% दर और ₹1.25 लाख की वार्षिक छूट पर कर लगभग (₹18,00,000 घटा ₹1,25,000) × 12.5% = ₹2,09,375 बनता है, surcharge और cess अलग।
वही व्यक्ति प्रीमियम ₹2.5 लाख या उससे कम रखता, तो 10(10D) की शर्तें पूरी होने पर परिपक्वता राशि छूट में रह सकती थी।
अपना PPLI संबंधी प्रश्न और उससे जुड़े देशों के नाम बताएँ, ताकि बातचीत सही विषय से शुरू हो सके।
अपना प्रश्न बताएँ →अब इसे उसी परिवार के पैमाने पर रखिए। ₹10 करोड़ की निवेश योग्य राशि को ₹2.5 लाख की वार्षिक छूट सीमा से भाग दें तो 400 आता है। यानी करमुक्त ULIP की सीमा में रहते हुए ₹10 करोड़ लगाने में चार सौ वर्ष लगेंगे। बाकी पैसा लगभग म्यूचुअल फंड जैसे कर व्यवहार में चला जाता है, ऊपर से बीमा के शुल्क।
निवासी भारतीय के लिए PPLI पर पहली रोक FEMA की है
PPLI पैमाने और निवेश की चौड़ाई के लिए लिया जाता है: अलग से प्रबंधित खाता, जिसमें निवेश प्रबंधक बीमाकर्ता की स्वीकृति से आता है, और ऐसी उत्तराधिकार व्यवस्था जो कई क्षेत्राधिकारों में मान्य हो। पर अगर आप भारत में निवासी हैं, तो कर का हिसाब बाद में आता है। पहले विदेशी मुद्रा कानून देखना होगा।
RBI की Insurance Master Direction में दर्ज नियम के अनुसार भारत में निवासी व्यक्ति भारत के बाहर के बीमाकर्ता की जीवन बीमा पॉलिसी तभी ले या रख सकता है जब उसके पास RBI की विशिष्ट या सामान्य अनुमति हो। LRS की Master Direction (6 सितंबर 2024 तक अद्यतन) में अनुमत उद्देश्यों की जो सूची है, उसमें जीवन बीमा प्रीमियम नहीं है। तो कोई कहे “LRS से PPLI का प्रीमियम भेज दीजिए”, तो रुककर पूछिए कि अनुमति कहाँ है। इस सवाल पर विस्तार से हमारे LRS, FEMA और विदेशी जीवन बीमा वाले लेख में लिखा है।
परिवार का कोई सदस्य विदेश में रहता है, या आप अभी NRI हैं और भारत लौटने वाले हैं, तो तस्वीर बदल जाती है। FEMA (Insurance) Regulations का विनियम 4(ii) उस पॉलिसी को रखने की अनुमति देता है जो व्यक्ति ने भारत से बाहर निवासी रहते हुए ली थी। समय की यह खिड़की भारत लौटने से पहले वाले लेख का विषय है।
कर में भी PPLI कोई जादू नहीं करता। विदेशी पॉलिसी पर ₹5 लाख वाली सीमा सामान्यतः पार हो जाती है, इसलिए भारतीय निवासी को सरेंडर या परिपक्वता पर छूट नहीं मिलती और लाभ प्राप्ति पर कर योग्य होता है। निवासी के हाथ ज़्यादातर कर का स्थगन और उत्तराधिकार की व्यवस्था आती है। इसका हिसाब PPLI की कर दक्षता में है।
GIFT City की डॉलर पॉलिसी के बारे में अब तक क्या तय है
कर वाली बात सबसे साफ़ है। वित्त अधिनियम 2025 के ज्ञापन के मुताबिक़ 1 अप्रैल 2025 से IFSC insurance intermediary office द्वारा जारी जीवन बीमा पॉलिसी की प्राप्तियों पर 10(10D) की छूट अधिकतम प्रीमियम वाली शर्त के बिना दी जानी थी। मतलब, ₹2.5 लाख और ₹5 लाख वाली सीमाएँ वहाँ नहीं लगतीं। ज्ञापन वजह भी लिखता है: IFSC से बीमा लेने वाले अनिवासियों को दूसरे विदेशी क्षेत्राधिकारों के बराबर स्थिति देना। 10(10D) की बाकी शर्तें और नए अधिनियम में इसका समतुल्य प्रावधान अलग से जाँचने होंगे।
नियामक का रुख़ भी लिखित में है। IFSCA की सितंबर 2025 की आधिकारिक प्रस्तुति में लिखा है: “Resident Indians may take Life & Health Insurance from IIOs under LRS.” LIC का IFSC पेज भी अपने ग्राहकों में “Resident Indians through LRS” गिनाता है। RBI की LRS Master Direction IFSC में “IFSCA Act 2019 के अनुसार वित्तीय सेवाएँ या उत्पाद” लेने के लिए प्रेषण की अनुमति देती है, लेकिन “LRS के तहत सभी अनुमत उद्देश्यों” की सीमा के भीतर।
दिक़्क़त यहाँ से शुरू होती है। हमें कोई RBI परिपत्र या FEMA (Insurance) Regulations में ऐसा संशोधन नहीं मिला जो जीवन बीमा के लिए विनियम 4 वाली अनुमति की शर्त को IIO के मामले में स्पष्ट रूप से हटाता हो। Cyril Amarchand Mangaldas ने नवंबर 2024 में लिखा था कि अगर RBI निवासियों को बिना पूर्व अनुमति GIFT IFSC से डॉलर जीवन बीमा लेने देना चाहता है, तो स्पष्टीकरण और विनियमों में संशोधन ज़रूरी है। IFSCA का कथन 2025 का है और उसी दिशा में इशारा करता है। फिर भी आपका बैंक प्रेषण को किस purpose code में डालेगा, यह लिखित में तय करवा लें। प्रस्ताव जाँचने का क्रम हमारे GIFT City IIO और विदेशी PPLI वाले लेख में है।
डॉलर में पॉलिसी लेने का मतलब है पूरी योजना डॉलर में सोचना। बच्चों की पढ़ाई विदेश में होनी है तो USD लाभ ख़र्च से मेल खाता है। ख़र्च रुपये में हैं तो रुपये में मूल्य विनिमय दर के साथ ऊपर-नीचे होगा, और आपको दिखाई गई किसी भी अनुमानित रिटर्न तालिका में यह जोखिम अलग से दिखना चाहिए।
तीनों रास्ते आमने-सामने
| प्रश्न | भारतीय ULIP | GIFT City IIO की पॉलिसी | विदेशी PPLI |
|---|---|---|---|
| कौन जारी करता है | IRDAI से पंजीकृत भारतीय बीमाकर्ता | IFSCA के तहत IFSC Insurance Office | विदेशी क्षेत्राधिकार का बीमाकर्ता |
| मुद्रा | रुपया | विदेशी मुद्रा, जैसे USD | आम तौर पर USD, EUR या अन्य |
| निवासी के लिए पहुँच | सामान्य रूप से उपलब्ध | IFSCA के अनुसार LRS से; RBI स्तर पर लिखित पुष्टि लें | विनियम 4 के तहत RBI की अनुमति चाहिए |
| परिपक्वता पर कर छूट | कुल वार्षिक प्रीमियम ₹2.5 लाख तक ही | वित्त अधिनियम 2025 से प्रीमियम सीमा के बिना, शर्तें जाँचें | निवासी के लिए सामान्यतः ₹5 लाख की सीमा पार, छूट नहीं |
| निवेश विकल्प | बीमाकर्ता के तय फंड | उत्पाद पर निर्भर | बीमाकर्ता की स्वीकृति से अलग प्रबंधित खाता |
| तरलता | पाँच साल का लॉक-इन | पॉलिसी की शर्तों पर निर्भर | पॉलिसी की शर्तों और सरेंडर शुल्क पर निर्भर |
फ़ैसले से पहले सात सवाल
- पॉलिसीधारक आयकर और FEMA दोनों के हिसाब से निवासी है या अनिवासी, और क्या अगले पाँच वर्षों में यह बदलेगा?
- पॉलिसी कौन-सी कानूनी इकाई जारी करेगी, और उसका नियामक कौन है?
- प्रीमियम किस खाते से और किस purpose code से जाएगा? बैंक ने यह लिखित में स्वीकार किया है?
- भविष्य के ख़र्च किस मुद्रा में हैं?
- वार्षिक प्रीमियम छूट की सीमा के भीतर है या बाहर? बाहर है तो कर का हिसाब किसने लिखकर दिया है?
- पाँच, दस और बीस वर्ष पर सरेंडर करने पर कुल लागत कितनी बनती है?
- मृत्यु होने पर राशि किसे मिलेगी, किस मुद्रा में, और कौन-से दस्तावेज़ लगेंगे?
लागत को परिवार की भाषा में, यानी रुपयों में लिखिए। मान लीजिए समान जोखिम वाले दो प्रस्तावों की कुल वार्षिक लागत में 0.40 प्रतिशत अंक का फ़र्क़ है। ₹10 करोड़ पर यह एक साल में ₹4 लाख हुआ। 0.40 का आँकड़ा सिर्फ़ हिसाब का तरीका दिखाने के लिए है, किसी उत्पाद की वास्तविक फीस से नहीं लिया गया। शुल्क के घटक अलग-अलग करके देखने का ढाँचा PPLI की लागत और अर्थशास्त्र में है।
PPLI हर परिवार का उत्तर नहीं है। आप भारत में निवासी हैं और RBI की अनुमति का कोई रास्ता नहीं बनता, तो बात वहीं रुक जाती है। निवेश योग्य राशि इतनी बड़ी न हो कि निश्चित शुल्क उसमें खप जाएँ, तब भी नहीं। अगले कुछ वर्षों में पैसे की ज़रूरत पड़ सकती है, तब भी नहीं। और अगर ज़रूरत सिर्फ़ मृत्यु सुरक्षा की है, तो साधारण term बीमा सस्ता और सीधा है। ऐसे परिवार के लिए ₹2.5 लाख तक की ULIP, म्यूचुअल फंड और term बीमा का मेल अक्सर काफ़ी होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
PPLI और ULIP में मूल अंतर क्या है?
ULIP भारत में IRDAI के नियमों के तहत बिकने वाली unit linked बीमा पॉलिसी की श्रेणी है, जिसमें प्रीमियम का हिस्सा बीमाकर्ता के तय फंडों में जाता है। PPLI आम तौर पर विदेशी बीमाकर्ता की निजी प्लेसमेंट वाली पॉलिसी होती है, जिसमें राशि बड़ी होती है और निवेश की व्यवस्था अलग से स्वीकृत होती है। निवासी भारतीय के लिए ULIP सामान्य रूप से उपलब्ध है, जबकि PPLI पर FEMA की शर्तें लागू होती हैं।
ULIP पर ₹2.5 लाख की सीमा कैसे लगती है?
1961 अधिनियम की धारा 10(10D) के परंतुक के तहत, 1 फरवरी 2021 को या उसके बाद जारी ULIP में किसी भी वर्ष देय प्रीमियम ₹2.5 लाख से अधिक हो, तो परिपक्वता या सरेंडर की राशि पर यह छूट नहीं मिलती। कई ULIP हों तो सीमा उनके कुल प्रीमियम पर देखी जाती है। मृत्यु पर मिलने वाली राशि पर यह सीमा लागू नहीं होती।
सीमा पार होने पर ULIP का लाभ कैसे कर योग्य होता है?
वित्त अधिनियम 2025 के ज्ञापन के अनुसार ऐसी ULIP पूँजीगत संपत्ति मानी जाती है। उसे भुनाने पर लाभ पूँजीगत लाभ के रूप में कर योग्य है, और उसे equity oriented fund की परिभाषा में शामिल किया गया है। आपकी वास्तविक दर फंड के मिश्रण, अवधि और लागू कर वर्ष पर टिकेगी, इसलिए गणना अपने CA से कराएँ।
क्या ULIP से पाँच साल से पहले पैसा निकाला जा सकता है?
IRDAI की उपभोक्ता जानकारी के अनुसार ULIP की लॉक-इन अवधि पाँच वर्ष है। इस बीच पॉलिसी बंद की तो discontinuance के नियम लागू होंगे, जिनके शुल्क की सीमा तय है। discontinuance और आंशिक निकासी की शर्तें अपनी पॉलिसी के दस्तावेज़ में पढ़ लें।
क्या निवासी भारतीय GIFT City से डॉलर जीवन बीमा ले सकता है?
IFSCA की सितंबर 2025 की प्रस्तुति कहती है कि निवासी भारतीय LRS के तहत IIO से जीवन और स्वास्थ्य बीमा ले सकते हैं, और LIC का IFSC पेज भी LRS के ज़रिये निवासी भारतीयों को ग्राहक बताता है। पर FEMA (Insurance) Regulations का विनियम 4 विदेशी बीमाकर्ता की पॉलिसी के लिए RBI की अनुमति माँगता है, और LRS की Master Direction में जीवन बीमा प्रीमियम सूचीबद्ध नहीं है। प्रीमियम भेजने से पहले बैंक और FEMA सलाहकार से लिखित पुष्टि ले लें।
क्या GIFT City की पॉलिसी पर ₹2.5 लाख या ₹5 लाख की सीमा लागू होती है?
वित्त अधिनियम 2025 के ज्ञापन में प्रस्ताव था कि 1 अप्रैल 2025 से IFSC insurance intermediary office द्वारा जारी जीवन बीमा पॉलिसी की राशि पर छूट अधिकतम प्रीमियम वाली शर्त के बिना मिले। ज्ञापन के मुताबिक़ इसका उद्देश्य अनिवासियों को समानता देना है। नए Income-tax Act 2025 में इसका समतुल्य प्रावधान क्या है और आपकी पॉलिसी पात्र है या नहीं, यह CA से जाँचें।
स्रोत
- IRDAI उपभोक्ता पोर्टल (policyholder.gov.in): Unit Linked Products
- आयकर विभाग: आयकर अधिनियम 1961, धारा 10, खंड (10D) और परंतुक
- वित्त विधेयक 2025 का ज्ञापन (Memorandum explaining the provisions)
- RBI: Master Direction, Insurance (7 दिसंबर 2021 तक अद्यतन)
- RBI: Master Direction, Liberalised Remittance Scheme (6 सितंबर 2024 तक अद्यतन)
- IFSCA: Insurance प्रस्तुति, सितंबर 2025
- LIC: IFSC Branch Office
- Cyril Amarchand Mangaldas: GIFT-IFSC and LRS, Insurance Products for Resident Indians? (नवंबर 2024)
संपादकीय मानक: स्रोत अक्टूबर 2026 तक जाँचे गए; सभी संख्यात्मक उदाहरण केवल उदाहरण हैं, किसी उत्पाद की वास्तविक दर या प्रस्ताव नहीं।
यह लेख केवल सूचना के लिए है। यह कानूनी, कर, निवेश या बीमा संबंधी सलाह नहीं है। नियम बदलते रहते हैं और उनका प्रयोग हर मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। कोई भी निर्णय लेने से पहले किसी योग्य पेशेवर से परामर्श करें।

Eldar PPLI.com की रणनीति, शोध और साझेदारियों का नेतृत्व करते हैं। उन्होंने 2020 में PPLI.com का अधिग्रहण किया और तब से प्राइवेट प्लेसमेंट लाइफ इंश्योरेंस पर काम कर रहे हैं।
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