सिंगापुर या लंदन के ब्रोकर के पास आपके नाम का खाता मृत्यु की सूचना पर जम जाता है। Custodian उस देश का grant या भारतीय grant की resealing माँगता है; भारत में बैंक अब भी probate या उत्तराधिकार प्रमाणपत्र माँग सकते हैं, हालाँकि धारा 213 की अनिवार्यता 2025 में हट गई। वसीयत न हो तो हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की श्रेणी I के वारिस बराबर हिस्से पाते हैं। निवासी वारिस बाद में बेचें तो 12.5% LTCG, लागत पिछले मालिक की (धारा 49)।
मृत्यु लाभ बीमाकर्ता से सीधे नॉमिनी या ट्रस्ट को जाता है। पति/पत्नी, संतान या माता-पिता नॉमिनी हों तो धारा 39(7) उन्हें "लाभार्थी नॉमिनी" बनाती है: रकम उनकी है। मृत्यु पर मिली रकम धारा 10(10D) के आठवें परंतुक से कर-मुक्त है; ₹ 5 लाख प्रीमियम की सीमा यहाँ लागू नहीं होती। न estate duty, न probate, न बाद की बिक्री पर पुरानी लागत का बोझ।
भाई या मित्र को नॉमिनी बनाएँ तो वह कानूनी वारिसों के लिए ट्रस्टी भर है (Sarbati Devi, 1984)। पॉलिसी HUF में बेटियों के जन्मसिद्ध हिस्से (2005 संशोधन) को नहीं छूती। पॉलिसीधारक UK का दीर्घकालिक निवासी या US person हो तो वहाँ का estate tax पॉलिसी पर भी लग सकता है, जब तक वह ट्रस्ट में न हो। और भारतीय निवासी नई विदेशी पॉलिसी RBI की अनुमति के बिना नहीं ले सकता: यह रास्ता NRI रहते बनता है।
सिंगापुर का custodian वहाँ का grant या भारतीय grant की resealing माँगता है; तब तक खाता जमा। विरासत पर कर नहीं (धारा 56(2)(x)), पर बाद की बिक्री पर पूरी वृद्धि पर 12.5% LTCG, लागत मृतक की। खाता हर साल Schedule FA में।
बीमाकर्ता मृत्यु प्रमाणपत्र और दावे पर नॉमिनी को भुगतान करता है, किसी न्यायालय के बिना। रकम 10(10D) से कर-मुक्त, वारिस के हाथ में नकद। पॉलिसी NRI रहते ली गई, इसलिए FEMA का प्रश्न नहीं।
Demat खाते का नॉमिनी केवल संभालने वाला है: Shakti Yezdani (2023) में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि शेयरों का नामांकन उत्तराधिकार का तरीका नहीं है। पत्नी को अन्य श्रेणी I वारिसों की सहमति या प्रमाणपत्र चाहिए।
पत्नी धारा 39(7) के तहत लाभार्थी नॉमिनी है: मृत्यु लाभ उसका है। MWPA 1874 की धारा 6 के तहत ली गई पॉलिसी तो शुरू से पत्नी और बच्चों का ट्रस्ट है, पति की संपदा और लेनदारों से बाहर।
पोर्टफोलियो वसीयत या हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम से बँटता है; नॉमिनी की भूमिका प्रक्रियागत है।
वही परिणाम। धारा 39(7) की सुविधा सिर्फ पति/पत्नी, संतान और माता-पिता के लिए है; कोई और नॉमिनी रकम कानूनी वारिसों के लिए ट्रस्टी की तरह पाता है (Sarbati Devi, 1984)। जिसे देना है उसे देने के लिए वसीयत, assignment (धारा 38) या ट्रस्ट चाहिए।
6 अप्रैल 2025 से UK का inheritance tax निवास-आधारित है: 20 में से 10 कर-वर्ष UK में रहे व्यक्ति की विश्वव्यापी संपदा पर, nil-rate band के ऊपर 40% (व्यवसायी विश्लेषण के अनुसार)।
मृतक के नाम की पॉलिसी उसी संपदा का हिस्सा है; दर कम नहीं होती। ट्रस्ट में लिखी पॉलिसी बाहर रह सकती है, पर वह UK की सलाह का विषय है। भारतीय कानून का लाभ यहाँ UK के कर को नहीं छूता।
2005 के संशोधन के बाद बेटियाँ जन्म से बराबर की coparcener हैं। बँटवारा, मूल्यांकन और अक्सर मुकदमा; व्यक्तिगत पोर्टफोलियो अलग से बँटता है।
व्यक्तिगत आय से ली गई पॉलिसी HUF की संपत्ति नहीं है: उसका मृत्यु लाभ नामित हिस्सों में, नकद और विवाद से पहले पहुँचता है। पॉलिसी coparcenary अधिकारों को नहीं बदलती; वह उनके बगल में एक स्पष्ट, तरल हिस्सा बनाती है।
US person वारिस भारतीय म्यूचुअल फंड पाए तो PFIC नियम, बड़ी विदेशी विरासत पर Form 3520 और FBAR (व्यवसायी विश्लेषण; सत्यापित नहीं)। NRI वारिस भारत से प्रति वित्त वर्ष USD 1 मिलियन तक प्रत्यावर्तन कर सकता है, RBI की शर्तों पर।
वारिस को नकद मिलता है, न PFIC, न probate। मृतक US person न हो तो US estate tax का प्रश्न पॉलिसी पर नहीं उठता; हो तो पॉलिसी IRC 7702 के अनुरूप होनी चाहिए। वारिस की अपनी सूचना-देयताएँ रहती हैं।
| विदेशी हिस्सा, दोनों रास्तों पर | |
| न्यायालयीन प्रक्रिया की लागत, पोर्टफोलियो | |
| विदेशी estate tax, पोर्टफोलियो | |
| वारिसों की बाद की बिक्री पर आयकर | |
| विदेशी estate tax, पॉलिसी | |
| मृत्यु लाभ पर भारतीय आयकर | |
| पॉलिसी के पक्ष में अंतर | |
| प्रति वारिस | |
| कौन पाता है और कब |