पारिवारिक विवाद, तलाक और व्यापारिक साझेदार: PPLI के भीतर वैध गोपनीयता की सीमाएँ
हैदराबाद के एक उद्यमी ने अपने व्यापारिक साझेदार से अलग होने का निर्णय लिया है, और अलगाव कड़वा है। साझेदार ने कंपनी के खातों पर सवाल उठाए हैं और संकेत दिया है कि वह उद्यमी की निजी संपत्तियों तक पहुँचेगा। उद्यमी के पास, सिंगापुर में रहते हुए ली गई, एक PPLI पॉलिसी है। उसका प्रश्न सलाहकार से सीधा है: क्या साझेदार, या उसका वकील, या अदालत, इस पॉलिसी के बारे में जान सकते हैं और उस तक पहुँच सकते हैं? और यदि मेरी पत्नी के साथ भी बात बिगड़ जाए, तो?
यह लेख उन दो प्रश्नों पर है, और उनसे जुड़े तीसरे पर: वारिसों के आपसी विवाद पर। यह भारतीय कानून के उन प्रावधानों को एक विदेशी PPLI पर लागू करता है जो पॉलिसी को लेनदारों से बचाते हैं, उन परिस्थितियों को बताता है जिनमें वह सुरक्षा नहीं चलती, और अदालती प्रकटीकरण की उस वास्तविकता को सामने रखता है जिसे कोई संरचना नहीं बदल सकती। यह लेख गोपनीयता श्रेणी में है; स्वामी और लाभार्थी की संरचना का प्रश्न नॉमिनी, वसीयत या ट्रस्ट में है, और लेनदार-सुरक्षा का व्यापक विवरण संपत्ति सुरक्षा पृष्ठ पर। कर विभाग से गोपनीयता इस लेख का विषय नहीं है और न ही यह साइट उसका दावा करती है।
गोपनीयता की तीन परतें: कौन देख सकता है
PPLI की गोपनीयता को तीन परतों में समझना उपयोगी है। पहली परत, जनता: पॉलिसी किसी सार्वजनिक रजिस्टर में नहीं है, कंपनी के शेयरों की तरह किसी शेयरधारक सूची में नहीं, अचल संपत्ति की तरह किसी उप-पंजीयक के रिकॉर्ड में नहीं। यह परत मज़बूत है। दूसरी परत, निजी तीसरे पक्ष जो जानना चाहते हैं: वारिस, तलाक में जीवनसाथी, व्यापारिक साझेदार, लेनदार। इनके लिए पॉलिसी तब तक अदृश्य है जब तक वे अदालत में न हों; अदालत में यह परत बदल जाती है। तीसरी परत, कर प्रशासन: पॉलिसी CRS के माध्यम से हर वर्ष रिपोर्ट होती है और Schedule FA में घोषित होती है; इस परत में कोई गोपनीयता नहीं है।
यह लेख दूसरी परत के बारे में है, और उसका मूल संदेश एक वाक्य में है: अदालत के बाहर पॉलिसी निजी है; अदालत के भीतर वह तब तक निजी है जब तक अदालत उसे देखने का आदेश न दे, और भारतीय अदालतें ऐसा आदेश दे सकती हैं।
अदालती प्रकटीकरण: जो संरचना नहीं रोक सकती
भारतीय दीवानी प्रक्रिया में मुकदमे के पक्षकार से दस्तावेज़ों और तथ्यों का प्रकटीकरण माँगा जा सकता है, और अदालत पक्षकार को अपनी संपत्तियों का हलफ़नामा देने का निर्देश दे सकती है। वैवाहिक मामलों में, भरण-पोषण और स्थायी गुज़ारे के प्रश्नों पर, अदालतें दोनों पक्षों से आय और संपत्ति का विवरण माँगती हैं। व्यापारिक विवादों में, विशेषकर जहाँ धोखाधड़ी या निधियों के हस्तांतरण का आरोप हो, अदालत संपत्तियों के खुलासे और उनके रोक (injunction) का आदेश दे सकती है। हम यहाँ प्रक्रिया के अनुच्छेदों का उद्धरण नहीं दे रहे, क्योंकि यह लेख उनके पाठ पर नहीं बना है; हम केवल वह सिद्धांत कह रहे हैं जिसे हर भारतीय मुकदमेबाज़ी का वकील जानता है।
इस सिद्धांत का PPLI पर अर्थ यह है कि यदि अदालत आपसे आपकी संपत्तियों का हलफ़नामा माँगे, तो पॉलिसी उसमें आएगी, और झूठा हलफ़नामा गोपनीयता नहीं, अपराध है। PPLI की वैध गोपनीयता अदालत के आदेश से ऊपर नहीं है, और जो सलाहकार इसे ऐसा बताता है वह गलत है। जो पॉलिसी करती है, वह अलग है: वह यह तय करती है कि प्रकटीकरण के बाद उस संपत्ति तक पहुँचा जा सकता है या नहीं, और यहीं भारतीय कानून के सुरक्षा प्रावधान आते हैं।
लेनदारों के विरुद्ध: तीन भारतीय प्रावधान
पहला, Code of Civil Procedure 1908 की धारा 60(1)(kb): "निर्णीत-ऋणी के जीवन पर बीमा पॉलिसी के तहत देय सभी राशियाँ" डिक्री के निष्पादन में कुर्की योग्य नहीं हैं। यह सत्यापित प्राथमिक पाठ है। इसका अर्थ यह है कि यदि कोई लेनदार उद्यमी के विरुद्ध डिक्री पा भी ले, तो उसके जीवन पर बीमा पॉलिसी के तहत देय राशि डिक्री के निष्पादन में कुर्क नहीं की जा सकती। इस प्रावधान की सीमाएँ ध्यान देने योग्य हैं: यह "निष्पादन में कुर्की" की बात करता है, और विदेशी बीमाकर्ता के पास रखी cash value पर इसकी प्रयोज्यता, जब लेनदार विदेशी अदालत में जाए, एक अलग प्रश्न है जिस पर हमारे पास कोई स्रोत नहीं है।
दूसरा, Insolvency and Bankruptcy Code 2016 की धारा 79(14)(d): व्यक्तिगत दिवालियापन में "बहिष्कृत संपत्तियों" में "ऋणी या उसके निकट परिवार के नाम पर ली गई कोई भी भार-रहित जीवन बीमा पॉलिसी या पेंशन योजना" शामिल है। यह भी सत्यापित पाठ है। लेकिन एक बड़ी चेतावनी: द्वितीयक स्रोतों के अनुसार IBC का भाग III (व्यक्तिगत दिवालियापन) अब तक केवल कॉर्पोरेट ऋणियों के व्यक्तिगत गारंटरों के लिए अधिसूचित है (1 दिसंबर 2019 से), और सामान्य व्यक्तिगत दिवालियापन अब भी पुराने Presidency Towns और Provincial Insolvency अधिनियमों के तहत है। इसलिए धारा 79(14)(d) आज मुख्यतः उस प्रमोटर के लिए प्रासंगिक है जिसने अपनी कंपनी के ऋण की व्यक्तिगत गारंटी दी है, जो हैदराबाद के उद्यमी जैसे पाठक के लिए ठीक वही स्थिति है।
तीसरा, Married Women's Property Act 1874 की धारा 6: पत्नी या पत्नी और बच्चों के लाभ के लिए व्यक्त पॉलिसी ट्रस्ट है और पति के लेनदारों के अधीन नहीं, "जब तक ट्रस्ट का कोई उद्देश्य शेष है"। यह भारतीय बीमाकर्ता की पॉलिसी का प्रावधान है; विदेशी PPLI पर इसका प्रभाव हमारे पास किसी स्रोत से उत्तरित नहीं है।
जो सुरक्षा नहीं चलती: धोखा, समय और look-back
यहाँ इस लेख का सबसे ज़रूरी हिस्सा है, क्योंकि PPLI की बिक्री में सबसे अधिक अतिशयोक्ति यहीं होती है।
MWPA की धारा 6 का परंतुक स्पष्ट है: वह "लेनदारों को धोखा देने के इरादे से" ली गई पॉलिसी की आय से भुगतान पाने के लेनदार के अधिकार को नहीं रोकता। यह सिद्धांत भारतीय कानून में हर जगह है। Transfer of Property Act 1882 की धारा 53(1) के अनुसार लेनदारों को हराने या विलंबित करने के इरादे से किया गया अचल संपत्ति का हस्तांतरण उन लेनदारों के विकल्प पर शून्यकरणीय है; यह पाठ अचल संपत्ति तक सीमित है, और चल संपत्ति के हस्तांतरण, जैसे पॉलिसी में प्रीमियम, दिवालियापन कानून और सामान्य धोखाधड़ी सिद्धांतों के तहत चुनौती योग्य हैं। द्वितीयक स्रोतों के अनुसार IBC की धाराएँ 164 और 165 कम मूल्य पर और अधिमान्य लेनदेनों को दो वर्ष के look-back में पलटने की अनुमति देती हैं।
अपना PPLI संबंधी प्रश्न और उससे जुड़े देशों के नाम बताएँ, ताकि बातचीत सही विषय से शुरू हो सके।
अपना प्रश्न बताएँ →इन सबका व्यावहारिक सार एक नियम में है: जो पॉलिसी ऋण के बाद, या मुकदमे की आशंका के बाद, या साझेदार के साथ विवाद शुरू होने के बाद ली गई है, वह उस ऋण या उस विवाद के विरुद्ध सुरक्षा नहीं देती, और संभवतः उसे लेनदारों को हराने के प्रयास के रूप में पलटा जा सकता है। हैदराबाद के उद्यमी की पॉलिसी यदि वर्षों पहले, सिंगापुर में, बिना किसी विवाद के ली गई थी, तो उसकी स्थिति मज़बूत है; यदि वह साझेदार के आरोपों के बाद ली गई होती, तो कमज़ोर, और शायद उल्टी। समय ही सब कुछ है, और समय को पीछे नहीं लिखा जा सकता।
तलाक: भारत में कोई सामुदायिक संपत्ति नहीं, लेकिन प्रकटीकरण है
भारत में विवाह के दौरान अर्जित संपत्ति का कोई स्वचालित "सामुदायिक संपत्ति" नियम नहीं है जैसा कुछ देशों में है; प्रत्येक जीवनसाथी की अपनी संपत्ति उसकी रहती है, और तलाक में प्रश्न भरण-पोषण और स्थायी गुज़ारे का होता है, जिसे अदालत दोनों पक्षों की आय और संपत्ति देखकर तय करती है। यह सामान्य सिद्धांत है और व्यक्तिगत कानून (हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, पारसी या विशेष विवाह अधिनियम) के अनुसार विवरण बदलते हैं; हमने यहाँ किसी अधिनियम की धारा का उद्धरण नहीं दिया है।
PPLI के लिए इसका अर्थ दो बातों में है। पहली, पॉलिसी पॉलिसीधारक की संपत्ति है और तलाक में अपने आप बँटती नहीं; लेकिन उसका cash value भरण-पोषण की गणना में पॉलिसीधारक की संपत्ति के रूप में गिना जा सकता है, और अदालत उसका खुलासा माँग सकती है। दूसरी, यदि पॉलिसी का लाभार्थी जीवनसाथी है, तो तलाक के बाद लाभार्थी बदलना पॉलिसीधारक का अधिकार है (जब तक नियुक्ति अपरिवर्तनीय न हो), और इस बदलाव को समय पर करना उन कुछ कामों में से है जो तलाक के बाद अक्सर छूट जाते हैं। ट्रस्ट-स्वामित्व वाली पॉलिसी में तलाक का प्रश्न ट्रस्ट डीड और ट्रस्ट के देश के कानून पर जाता है, जो विदेशी ट्रस्ट में भारतीय अदालत के लिए भी एक जटिल प्रश्न है।
वारिसों के बीच: कौन क्या माँग सकता है
पॉलिसीधारक की मृत्यु के बाद वारिसों का विवाद प्रायः इस प्रश्न पर होता है कि पॉलिसी का भुगतान संपदा का हिस्सा है या लाभार्थी का अपना। विदेशी PPLI में लाभार्थी का अनुबंधीय अधिकार, जैसा नॉमिनी वाले लेख में समझाया गया है, भारतीय नॉमिनी से मज़बूत है। लेकिन यदि कोई वारिस भारतीय अदालत में यह दावा करे कि पॉलिसी मृतक की संपदा से वित्तपोषित थी और वारिसों के अधिकारों को हराने के लिए बनी थी, तो अदालत पॉलिसी के दस्तावेज़ माँग सकती है, और तब पॉलिसी का पूरा विवरण, cash value, लाभार्थी, प्रीमियम का इतिहास, अदालत के रिकॉर्ड में आएगा। Hindu Succession Act 1956 की धारा 6 में 2005 के संशोधन के बाद बेटियाँ जन्म से सहदायिक हैं, जो पैतृक संपत्ति के विवादों में इस प्रश्न को और प्रासंगिक बनाता है कि पॉलिसी का प्रीमियम पैतृक निधियों से था या स्व-अर्जित।
गोपनीयता की दृष्टि से इसका उत्तर संरचना में है, चालाकी में नहीं: पॉलिसी का प्रीमियम स्व-अर्जित और प्रलेखित निधियों से; लाभार्थी की नियुक्ति स्पष्ट और, जहाँ उचित हो, ट्रस्ट के माध्यम से; और, जहाँ परिवार में तनाव है, पॉलिसीधारक के जीवनकाल में ही परिवार के भीतर एक लिखित समझौता। जो वारिस जानता है कि उसे क्या मिलेगा, वह प्रायः मुकदमा नहीं करता।
व्यापारिक साझेदार: गारंटी, कंपनी और निजी संपत्ति
हैदराबाद के उद्यमी के लिए तीन अलग प्रश्न हैं। पहला, क्या साझेदार को पॉलिसी के बारे में पता चल सकता है: अदालत के बाहर नहीं; अदालत में, प्रकटीकरण के आदेश पर, हाँ। दूसरा, क्या साझेदार पॉलिसी तक पहुँच सकता है: यदि उसे उद्यमी के विरुद्ध व्यक्तिगत डिक्री मिले, तो CPC धारा 60(1)(kb) जीवन बीमा के तहत देय राशि को कुर्की से बचाती है; यदि उद्यमी ने कंपनी के ऋण की व्यक्तिगत गारंटी दी है और IBC के तहत गारंटर की दिवालियापन प्रक्रिया शुरू हो, तो धारा 79(14)(d) पॉलिसी को बहिष्कृत संपत्ति बनाती है। तीसरा, क्या यह सुरक्षा टिकेगी: तभी, जब पॉलिसी विवाद और ऋण से पहले, वैध निधियों से, बिना धोखे के इरादे के ली गई हो।
एक चौथा प्रश्न जो कम पूछा जाता है: विदेशी बीमाकर्ता के पास रखी cash value पर भारतीय अदालत की डिक्री का व्यावहारिक प्रवर्तन। भारतीय डिक्री को लक्ज़मबर्ग या सिंगापुर में लागू कराने के लिए लेनदार को वहाँ की प्रक्रिया से गुज़रना होगा, और वहाँ के कानून में पॉलिसी की अपनी सुरक्षा है, जैसे लक्ज़मबर्ग में पॉलिसी की संपत्तियों का बीमाकर्ता के पास अलगाव। यह एक व्यावहारिक परत है, कानूनी छूट नहीं, और इस पर हम कोई दावा नहीं करते; केवल यह कि यह प्रश्न उद्यमी के वकील को दोनों देशों में पूछना चाहिए।
यह क्या नहीं है
PPLI लेनदारों को धोखा देने का साधन नहीं है, और जो पॉलिसी उसी इरादे से ली गई है, वह भारतीय कानून के हर प्रासंगिक प्रावधान के परंतुक में आती है। यह अदालत के प्रकटीकरण आदेश से ऊपर नहीं है; झूठा हलफ़नामा अपराध है। यह तलाक में जीवनसाथी के भरण-पोषण के अधिकार को नहीं हराता; अदालत cash value को संपत्ति के रूप में देख सकती है। यह वारिसों के वैध अधिकारों के विरुद्ध ढाल नहीं है। और यह लेख भारतीय दीवानी प्रक्रिया, वैवाहिक कानून या दिवालियापन कानून की व्याख्या नहीं है; उनके सिद्धांत यहाँ सामान्य रूप में हैं, और CPC धारा 60(1)(kb), IBC धारा 79(14)(d), MWPA धारा 6 तथा TPA धारा 53 के अलावा किसी अनुच्छेद का उद्धरण नहीं है। जो लेख करता है, वह यह है: वह बताता है कि पॉलिसी की गोपनीयता कहाँ तक वैध है, और वहाँ से आगे उसकी सुरक्षा समय, वैधता और संरचना पर टिकी है, गोपनीयता पर नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या मेरा व्यापारिक साझेदार मेरी PPLI पॉलिसी के बारे में जान सकता है?
अदालत के बाहर नहीं; पॉलिसी किसी सार्वजनिक रजिस्टर में नहीं है। अदालत में, यदि मुकदमे में अदालत आपसे संपत्तियों का हलफ़नामा या दस्तावेज़ों का प्रकटीकरण माँगे, तो पॉलिसी उसमें आएगी और झूठा हलफ़नामा अपराध है। PPLI की गोपनीयता अदालत के आदेश से ऊपर नहीं है। पॉलिसी जो करती है, वह प्रकटीकरण के बाद उस तक पहुँच का प्रश्न तय करती है, जिसमें CPC धारा 60(1)(kb) और IBC धारा 79(14)(d) प्रासंगिक हैं।
क्या लेनदार डिक्री के निष्पादन में पॉलिसी कुर्क कर सकता है?
Code of Civil Procedure 1908 की धारा 60(1)(kb) के अनुसार निर्णीत-ऋणी के जीवन पर बीमा पॉलिसी के तहत देय सभी राशियाँ डिक्री के निष्पादन में कुर्की योग्य नहीं हैं। यह सत्यापित पाठ है। इसकी सीमाएँ: यह निष्पादन में कुर्की की बात करता है, धोखे से ली गई पॉलिसी पर सामान्य धोखाधड़ी सिद्धांत लागू रहते हैं, और विदेशी बीमाकर्ता के पास रखी cash value पर विदेशी अदालत में प्रवर्तन एक अलग प्रश्न है।
IBC में पॉलिसी की क्या स्थिति है?
Insolvency and Bankruptcy Code 2016 की धारा 79(14)(d) व्यक्तिगत दिवालियापन की बहिष्कृत संपत्तियों में ऋणी या उसके निकट परिवार के नाम पर ली गई भार-रहित जीवन बीमा पॉलिसी को शामिल करती है। लेकिन द्वितीयक स्रोतों के अनुसार IBC का भाग III अब तक केवल कॉर्पोरेट ऋणियों के व्यक्तिगत गारंटरों के लिए अधिसूचित है, इसलिए यह प्रावधान मुख्यतः उस प्रमोटर के लिए प्रासंगिक है जिसने कंपनी के ऋण की व्यक्तिगत गारंटी दी है। IBC की धाराएँ 164 और 165 दो वर्ष के look-back में कम मूल्य के लेनदेन पलट सकती हैं।
यदि पॉलिसी ऋण या विवाद के बाद ली गई हो तो?
तब सुरक्षा कमज़ोर है और संभवतः उल्टी। MWPA धारा 6 का परंतुक लेनदारों को धोखा देने के इरादे से ली गई पॉलिसी को सुरक्षा से बाहर रखता है; TPA धारा 53 अचल संपत्ति के ऐसे हस्तांतरण को शून्यकरणीय बनाती है और चल संपत्ति पर दिवालियापन कानून तथा धोखाधड़ी सिद्धांत लागू हैं। जो पॉलिसी ऋण, मुकदमे की आशंका या विवाद के बाद ली गई है, वह उस ऋण या विवाद के विरुद्ध सुरक्षा नहीं देती। समय को पीछे नहीं लिखा जा सकता।
तलाक में PPLI का क्या होता है?
भारत में विवाह के दौरान अर्जित संपत्ति का स्वचालित बँटवारा नहीं है; प्रश्न भरण-पोषण और स्थायी गुज़ारे का है, जिसे अदालत दोनों पक्षों की आय और संपत्ति देखकर तय करती है और उसका खुलासा माँग सकती है। पॉलिसी पॉलिसीधारक की रहती है, लेकिन उसका cash value उसकी संपत्ति के रूप में गिना जा सकता है। यदि लाभार्थी जीवनसाथी है, तो तलाक के बाद लाभार्थी बदलना पॉलिसीधारक का अधिकार है, जब तक नियुक्ति अपरिवर्तनीय न हो। यह सामान्य सिद्धांत है; व्यक्तिगत कानून के अनुसार विवरण बदलते हैं।
क्या वारिस पॉलिसी के भुगतान को चुनौती दे सकते हैं?
दावा किया जा सकता है, विशेषकर इस आधार पर कि पॉलिसी मृतक की संपदा से वित्तपोषित थी या वारिसों को हराने के लिए बनी थी; तब अदालत पॉलिसी के दस्तावेज़ माँग सकती है और उसका विवरण रिकॉर्ड में आएगा। विदेशी PPLI में लाभार्थी का अनुबंधीय अधिकार भारतीय नॉमिनी से मज़बूत है। सबसे अच्छा बचाव संरचना में है: स्व-अर्जित और प्रलेखित प्रीमियम, स्पष्ट लाभार्थी नियुक्ति, और जहाँ तनाव है, पॉलिसीधारक के जीवनकाल में परिवार के भीतर लिखित समझौता।
क्या भारतीय अदालत की डिक्री विदेशी बीमाकर्ता के पास रखी cash value तक पहुँच सकती है?
भारतीय डिक्री को लक्ज़मबर्ग या सिंगापुर में लागू कराने के लिए लेनदार को वहाँ की प्रक्रिया से गुज़रना होगा, और वहाँ के कानून में पॉलिसी की अपनी सुरक्षा है, जैसे लक्ज़मबर्ग में पॉलिसी की संपत्तियों का अलगाव। यह व्यावहारिक परत है, कानूनी छूट नहीं, और इस पर हम कोई दावा नहीं करते। यह प्रश्न दोनों देशों के वकीलों से पूछना चाहिए, और धोखे से ली गई पॉलिसी पर किसी भी देश का कानून दयालु नहीं है।
क्या PPLI कर विभाग से भी गोपनीय है?
नहीं। पॉलिसी CRS के माध्यम से बीमाकर्ता के देश से भारत को हर वर्ष रिपोर्ट होती है और सामान्य निवासी पॉलिसीधारक उसे Schedule FA में घोषित करता है; अप्रकटीकरण पर काला धन अधिनियम 2015 के परिणाम हैं। इस लेख की गोपनीयता निजी तीसरे पक्षों, यानी जनता, वारिसों, जीवनसाथी, साझेदारों और लेनदारों, के संबंध में है, और वह भी अदालत के प्रकटीकरण आदेश के अधीन। कर प्रशासन से गोपनीयता का दावा यह साइट कहीं नहीं करती।
स्रोत और प्राधिकार
Code of Civil Procedure 1908, धारा 60(1)(kb) (indiankanoon.org)। Insolvency and Bankruptcy Code 2016, धारा 79(14)(d) (indiankanoon.org); भाग III की अधिसूचना की स्थिति और धाराएँ 164 तथा 165 द्वितीयक स्रोतों से। Married Women's Property Act 1874, धारा 6 और उसका परंतुक (indiacode.nic.in)। Transfer of Property Act 1882, धारा 53(1) (indiankanoon.org)। Hindu Succession Act 1956 का 2005 संशोधन, द्वितीयक स्रोत से। दीवानी प्रक्रिया में प्रकटीकरण, वैवाहिक मामलों में संपत्ति के हलफ़नामे और तलाक में संपत्ति के सिद्धांत इस लेख में सामान्य रूप में हैं और किसी अनुच्छेद से उद्धृत नहीं; विदेशी बीमाकर्ता के पास रखी cash value पर भारतीय डिक्री के प्रवर्तन और विदेशी PPLI पर MWPA के प्रभाव पर हमारे पास कोई स्रोत नहीं है। CBDT Guidance Note on FATCA and CRS (incometaxindia.gov.in)।
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यह लेख केवल सूचना के लिए है। यह कानूनी, कर, निवेश या बीमा संबंधी सलाह नहीं है। नियम बदलते रहते हैं और उनका प्रयोग हर मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। कोई भी निर्णय लेने से पहले किसी योग्य पेशेवर से परामर्श करें।

Eldar PPLI.com की रणनीति, शोध और साझेदारियों का नेतृत्व करते हैं। उन्होंने 2020 में PPLI.com का अधिग्रहण किया और तब से प्राइवेट प्लेसमेंट लाइफ इंश्योरेंस पर काम कर रहे हैं।
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